कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को एक ऐसी खिलाड़ी मिली है, जिसकी कहानी संघर्ष, हिम्मत और सफलता की मिसाल बन गई है. हरियाणा की शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. पोलियो और निजी जिंदगी की मुश्किलों से लड़ने वाली शर्मिला ने अपनी मेहनत के दम पर दुनिया के बड़े मंच पर भारत का नाम रोशन किया.
शर्मिला धनखड़ का जन्म 15 अगस्त 1986 को हरियाणा के रेवाड़ी में हुआ था. बचपन में तेज बुखार के बाद उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे उनका बायां पैर प्रभावित हुआ. आर्थिक परेशानियों के बीच उनका बचपन गुजरा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. शुरुआती जीवन में कई कठिनाइयों के बावजूद शर्मिला ने खुद को मजबूत बनाया और खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई.
⚡️Historic Moment 🥇 #IndiaAtCWG
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 28, 2026
🇮🇳 Sharmila Dhankar wins Gold in Women's Shot Put F57 & creates history at #CWG2026. She becomes India's first-ever Commonwealth Games Gold medallist in Para Athletics. #TeamIndia
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शर्मिला की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें घरेलू हिंसा और परेशानियों का सामना करना पड़ा. पहली शादी के बाद उन्हें दहेज और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. दो बेटियों की जिम्मेदारी के साथ वह अपने मायके लौट आईं. परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने आया का काम भी किया. संघर्षों के बीच उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश की और जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की.
28 साल की उम्र में शर्मिला ने दूसरी शादी की. उनके पति अजीत सिंह ने उन्हें खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने का फैसला किया. राव तुलाराम स्टेडियम में ट्रेनिंग के दौरान उन्हें पैरा एथलीट और कोच टेकचंद का मार्गदर्शन मिला. शुरुआत में उनका शॉट पुट थ्रो केवल 5 मीटर तक जाता था, लेकिन मेहनत से उन्होंने खुद को बेहतर बनाया.
शर्मिला ने लगातार प्रैक्टिस के दम पर जल्द ही बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली. एक साल के अंदर उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और 7.40 मीटर थ्रो के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. उनके पति और दोनों बेटियां हमेशा उनका हौसला बढ़ाते रहे. परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत से उन्होंने पैरा खेलों में मजबूत पहचान बनाई.
शर्मिला ने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू किया था, जहां वह चौथे स्थान पर रही थीं. इसके बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया. 2025 इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड जीता. 2026 में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया है.