नई दिल्ली: बांग्लादेश क्रिकेट इस समय लगातार विवादों में घिरा हुआ है. एक के बाद एक सामने आ रहे मुद्दों ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के साथ टकराव को लेकर चर्चा हुई और अब बोर्ड के चुनाव को लेकर नया विवाद सामने आ गया है.
हालिया घटनाक्रम में BCB द्वारा 2026 टी20 वर्ल्ड कप से हटने के फैसले ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. यह फैसला उस समय लिया गया, जब मुस्तफिजुर रहमान के आईपीएल से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया था. इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी. खास तौर पर अध्यक्ष अमिनुल इस्लाम के चयन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
इसी बीच BCB ने सरकार को संकेत दिया कि अगर बोर्ड के मामलों में अधिक हस्तक्षेप किया गया, तो मामला ICC तक पहुंच सकता है. हालांकि, इस पर पूर्व एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के सीईओ सैय्यद अशरफुल हक ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि ICC का नाम लेना केवल दबाव बनाने की रणनीति है, ताकि बोर्ड खुद को बचा सके.
अशरफुल हक के मुताबिक, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड सीधे तौर पर नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल (NSC) के अधीन आता है. यदि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है या बोर्ड सही तरीके से काम नहीं करता, तो NSC के पास उसे भंग करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान पहले से ही नियमों में मौजूद है.
उन्होंने यह भी कहा कि ICC इस तरह के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता. ICC केवल दिशा-निर्देश जारी करता है, लेकिन किसी देश के क्रिकेट बोर्ड के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता. उदाहरण के तौर पर उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र किया, जहां कई बार बोर्ड में बदलाव हुए, लेकिन ICC ने कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं किया. उन्होंने कहा कि ICC को मालिक नहीं बल्कि सहयोगी ही समझा जाना चाहिए.
वहीं, बांग्लादेश के खेल मंत्री ने साफ किया है कि सरकार किसी भी निर्णय में जल्दबाजी नहीं करेगी. पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा और फिर ICC से बातचीत के बाद आगे का कदम उठाया जाएगा. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है, क्योंकि अगर आरोप सही पाए गए तो BCB के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है.