नई दिल्ली: कभी मेट्रो में सफर करते हुए, कभी किसी कैफे की लाइन में खड़े होकर या ऑफिस लिफ्ट में अचानक किसी अजनबी से नजरें मिली होंगी. कुछ सेकंड का वह पल खत्म हो जाता है, लेकिन दिमाग दिनभर उसी के बारे में सोचता है. अब Gen Z ने इस एहसास को नया नाम दे दिया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस ट्रेंड का रिश्ता सिर्फ रोमांस से नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग के इमोशनल रिएक्शन से भी जुड़ा है.
रिलेशनशिप एक्सपर्ट के अनुसार, आई कॉन्टैक्ट इंसानों के बीच सबसे मजबूत गैर-शाब्दिक संकेतों में से एक माना जाता है. इसमें ऐसा होता कि दोनों के बीच कोई बात नहीं होती है फिर भी डीप फीलिंंग डेवलप हो जाती है.
कई लोग यह महसूस करते हैं कि किसी शख्स से अचानक ही नजरें मिली लेकिन उसके बारे में वो दिन पर सोचते हैं. दिमाग में उसी अंजान शख्स का चेहरा घूमता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंसानी दिमाग आई कॉन्टैक्ट को एक खास सोशल सिग्नल मानता है. जब कोई लगातार कुछ सेकंड तक देखता है, तो दिमाग तुरंत उस पल को भावनात्मक रूप से खास समझने लगता है. यही वजह है कि छोटी-सी मुलाकात भी लंबे समय तक याद रह सकती है.
साइकोलॉजिस्ट इसे 'प्रोजेक्शन' कहते हैं. जब सामने वाले इंसान के बारे में कोई जानकारी नहीं होती, तब दिमाग अपनी भावनाओं और इच्छाओं के हिसाब से उसकी एक इमेज बना लेता है. यह तब और होता है जब आप अकेले हो या सिंगल हो. अगर कोई अकेलापन महसूस कर रहा हो, तो उसे सामने वाला व्यक्ति भी इमोशनली कनेक्टेड लगता है. यही कल्पनाएं इस एहसास को और गहरा बना देती हैं.
लेकिन कहते हैं ना अपनी कल्पना में ही खोए रहना सही नहीं है. इस केस में भी वही रुल अप्लाई होता है. आंखों का संपर्क सामान्य भावनात्मक अनुभव माना जाता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बार-बार उन्ही ख्यालों में रह रहा है तो यह सही नहीं. इससे रियल लाइफ से आप दूर होने लगते हैं.
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