आजकल बाजार में मिलने वाले मसालों की शुद्धता पर सवाल उठना लाजमी हो गया है. खासकर हल्दी, जो हर भारतीय रसोई का हिस्सा है और आयुर्वेद में दवा के रूप में भी इस्तेमाल होती है, उसमें मिलावट आम बात हो गई है. अगर रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी नकली है तो यह धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए इसे खरीदने और इस्तेमाल करने से पहले शुद्धता जांचना बहुत जरूरी है.
कई बार व्यापारी हल्दी को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए उसमें केमिकल कलर मिला देते हैं. मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे आर्टिफिशियल रंग, चॉक पाउडर, स्टार्च और जंगली हल्दी जैसी सस्ती चीजें मिलाकर वजन बढ़ा दिया जाता है. ये मिलावट न सिर्फ हल्दी का असली स्वाद और फायदे खत्म कर देते हैं बल्कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर लीवर, पेट और त्वचा पर बुरा असर डाल सकते हैं.
घरेलू आसान टेस्ट – वॉटर टेस्ट
सबसे आसान और विश्वसनीय तरीका है गुनगुने पानी का टेस्ट. एक गिलास गुनगुने पानी लें. उसमें एक चम्मच हल्दी पाउडर डालकर अच्छे से हिलाएं. 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें.
नतीजा:- अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला पड़ जाए तो आपकी हल्दी शुद्ध है. अगर पानी गहरा पीला हो जाए, हल्दी तुरंत घुलने लगे या ऊपर तैरने लगे तो समझ लीजिए इसमें मिलावट है.
दूसरा आसान टेस्ट है हथेली पर रगड़ने का
एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखें. अंगूठे से 15-20 सेकंड तक अच्छे से रगड़ें. असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है जो धीरे-धीरे फीका पड़ता है. नकली हल्दी तेज रंग छोड़ती है, जो मुश्किल से जाता है या बहुत चिपचिपा महसूस होता है.
और भी कुछ आसान संकेत
असली हल्दी की खुशबू मिट्टी जैसी प्राकृतिक होती है, जबकि नकली में केमिकल की तेज गंध आती है. असली हल्दी थोड़ी खुरदरी होती है, नकली बहुत महीन और चिकनी लगती है. अगर हल्दी का रंग बहुत चमकदार नारंगी-पीला है तो सावधानी बरतें.
मिलावटी हल्दी के नुकसान
नकली हल्दी में मौजूद केमिकल पेट की समस्या, एलर्जी, सिरदर्द और लंबे समय में लीवर डैमेज का कारण बन सकते हैं. खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे ज्यादा खतरा होता है. शुद्ध हल्दी एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करती है. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या लोकल ऑर्गेनिक स्टोर से हल्दी खरीदें.