नई दिल्ली: घर की सजावट करते वक्त दीवार पर कील ठोकना लगभग हर किसी के लिए जरूरी काम बन जाता है, चाहे बात फोटो फ्रेम टांगने की हो या घड़ी-कैलेंडर लगाने की. लेकिन इस दौरान सबसे बड़ी परेशानी यह आती है कि हथौड़े की चोट से दीवार का प्लास्टर उखड़ जाता है और आसपास बदसूरत दरारें या गड्ढे बन जाते हैं. खासकर प्लास्टर वाली दीवारों पर यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.
दरअसल हथौड़े की चोट का दबाव सीधे आसपास के हिस्से पर पड़ता है, जिससे कमजोर या नमी वाले प्लास्टर में दरारें आ सकती हैं. ऐसे में कील ठोकने से पहले सही जगह और सही तरीका चुनना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि दीवार को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे.
कील लगाने से पहले उस जगह को ध्यान से देखना जरूरी है. अगर वहां पहले से दरार या उभरा हुआ प्लास्टर नजर आए, तो उस जगह कील ठोकने से बचना चाहिए. दीवार के कोने-किनारे भी कमजोर हो सकते हैं. एक आसान तरीका है कि उंगलियों से हल्के हाथ से उस जगह को थपथपाकर देखें. सामान्य और ठोस आवाज आने पर जगह मजबूत मानी जाती है, जबकि खोखली आवाज प्लास्टर के कमजोर होने का संकेत देती है.
हर तरह की दीवार के लिए एक जैसी कील का इस्तेमाल करना सही नहीं होता. प्लास्टर या ड्राईवॉल जैसी नरम सतह के लिए पतली स्टील की कील उपयुक्त रहती है, जबकि कंक्रीट की सख्त दीवार पर सामान्य कील ठोकने से सतह टूट सकती है. ईंट की दीवार पर कील लगाते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए और जहां तक संभव हो, ईंटों के बीच मसाले वाले हिस्से को निशाना बनाना बेहतर होता है.
प्लास्टर को टूटने से बचाने के लिए कील वाली जगह पर पेंटर टेप लगाना असरदार तरीका साबित हो सकता है. टेप के ऊपर से कील रखकर धीरे-धीरे हथौड़ा चलाएं, इससे सतह स्थिर रहती है. इसके अलावा शुरुआत में कील को हाथ से पकड़ने के बजाय छोटी क्लिप या कंघी का सहारा लेना भी उंगलियों को चोट से बचाता है और कील के फिसलने का खतरा कम करता है. सबसे आम गलती यह होती है कि लोग शुरुआत से ही हथौड़े से जोरदार वार करने लगते हैं, जिससे कील फिसल सकती है और प्लास्टर को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए पहली कुछ चोटें हमेशा हल्के हाथ से करनी चाहिए.