सोते समय हमारे आसपास होने वाली हल्की आवाज भी कई बार हमारी नींद खोल देती है. किसी के नाम पुकारने या अचानक तेज आवाज होने पर हम तुरंत जाग सकते हैं लेकिन जो व्यक्ति रातभर तेज खर्राटे लेता है, उसे अक्सर अपने ही खर्राटों की आवाज का एहसास नहीं होता.
इसका जवाब हमारे दिमाग की आवाजों को पहचानने और उन्हें प्राथमिकता देने की क्षमता में छिपा है. नींद के दौरान भी कान आसपास की आवाजों को महसूस करते रहते हैं और उनके संकेत दिमाग तक पहुंचते हैं. हालांकि, दिमाग हर आवाज पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देता. वह यह तय करता है कि कौन सी आवाज महत्वपूर्ण है और किसे नजरअंदाज किया जा सकता है.
दिमाग का थैलेमस कई तरह की संवेदी सूचनाओं को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नींद के दौरान बाहरी आवाजों की प्रतिक्रिया कम हो जाती है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होती. अचानक, तेज या महत्वपूर्ण आवाजें दिमाग को ज्यादा सक्रिय कर सकती हैं और नींद में हलचल पैदा कर सकती हैं.
खुद के खर्राटे एक परिचित और बार-बार आने वाली ध्वनि होते हैं. दिमाग इन आवाजों को आमतौर पर किसी नए या तत्काल खतरे के संकेत के तौर पर नहीं देखता. इसलिए उनकी प्रतिक्रिया बाहरी अचानक होने वाली आवाजों की तुलना में कम हो सकती है.
हालांकि, यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि दिमाग खर्राटों को हमेशा पूरी तरह ब्लॉक कर देता है. खर्राटों की आवाज इतनी तेज हो सकती है कि उससे नींद प्रभावित हो और व्यक्ति को बार-बार हल्की जाग भी आ सकती है.
खर्राटे आमतौर पर सोते समय ऊपरी सांस की नली के ऊतकों में कंपन के कारण पैदा होते हैं. नींद में गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं और सांस की नली कुछ संकरी हो सकती है. जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है, तो आसपास के नरम ऊतक कंपन करने लगते हैं. इसी कंपन से खर्राटों की आवाज पैदा होती है. खर्राटों की तीव्रता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है. कुछ लोगों में यह हल्की आवाज होती है, जबकि कुछ लोगों के खर्राटे काफी तेज हो सकते हैं.
यह जरूरी नहीं कि खर्राटे लेने वाला व्यक्ति पूरी रात बिना किसी व्यवधान के सोता रहे. तेज खर्राटों या सांस लेने में परेशानी के कारण नींद में छोटे-छोटे व्यवधान हो सकते हैं, जिन्हें माइक्रो-अराउजल्स कहा जाता है. कई बार व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए जागता है और फिर दोबारा सो जाता है. सुबह उसे इन छोटी जागने वाली घटनाओं की याद नहीं रहती.
हर तरह के खर्राटे बीमारी का संकेत नहीं होते. लेकिन अगर खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकने या घुटने जैसी स्थिति, बार-बार नींद टूटना, सुबह सिरदर्द, दिनभर अत्यधिक नींद या थकान जैसी समस्या हो, तो यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी कराना महत्वपूर्ण होता है. खासकर तब, जब खर्राटे बहुत तेज हों और सांस रुकने की घटनाएं दिखाई दें.