किसी भी रिश्ते में 'बाउंड्रीज' यानी सीमाओं का होना बहुत जरूरी माना जाता है, खासकर तब जब जिंदगी में 'एक्स-पार्टनर' मौजूद हो. भारत में तलाकशुदा, अलग हुए और विधवा/विधुर लोगों के लिए बने मैचमेकिंग ऐप 'रीबाउंड' (Rebounce) ने एक नया सर्वे किया है. इस सर्वे में 30 से 40 वर्ष की आयु के 9,283 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिनका कम से कम दो साल पहले तलाक हो चुका है.
सर्वे का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 10 में से 7 (70%) लोग तलाक के बाद भी अपने पूर्व साथी के साथ शादी की तस्वीरें संभालकर रखते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे पुरानी शादी से बाहर नहीं निकल पाए हैं. कई बार बच्चे, संपत्ति या पुरानी यादें बीते कल का एक हिस्सा होती हैं. लोग तस्वीरों को पुरानी जिंदगी के एक रिकॉर्ड के रूप में देखते हैं, जिसे मिटाना जरूरी नहीं समझते.
35 वर्ष से अधिक उम्र के 47% लोगों का मानना है कि 'नो-कॉन्टैक्ट' (कोई बातचीत न रखना) ही एकमात्र बाउंड्री नहीं है. बच्चों की परवरिश (Co-parenting), स्कूल के कार्यक्रमों, संपत्ति या कानूनी मामलों के लिए करीब 31% लोग अपने पूर्व साथी से जरूरत पड़ने पर बात करते हैं. सर्वे के मुताबिक, जब तक बातचीत व्यावहारिक जिम्मेदारियों के लिए है, तब तक इसे भावनात्मक निर्भरता नहीं माना जाता.
लगभग 3,384 उत्तरदाताओं ने माना कि पहली शादी के अनुभव और आदतें कई बार नए रिश्ते को प्रभावित करती हैं. त्योहार मनाने का तरीका, पारिवारिक बातचीत और विवाद सुलझाने का तरीका पुरानी शादी से प्रेरित हो सकता है. मुंबई के 37 वर्षीय आदित्य के अनुसार, चुनौती तब आती है जब नया पार्टनर पुरानी उम्मीदें थोपने लगता है. असल बाउंड्री वही है जो नए रिश्ते में स्पष्टता और मानसिक शांति दे.