नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर सुर्खियों में हैं. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका हर कीमत पर ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहता है. उनका कहना है कि यह सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि अमेरिका के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने पहले ही बताया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य विकल्प भी शामिल है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ग्रीनलैंड को आसान तरीके से नहीं पाया गया, तो मुश्किल रास्ता अपनाया जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे डेनमार्क का सम्मान करते हैं और दोनों देशों के रिश्ते अच्छे रहे हैं.
इसके बावजूद ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है. ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए बेहद अहम मानी जाती है. यह नॉर्थ पोल के बेहद करीब है और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य ताकत को मजबूत करता है. ग्रीनलैंड में मौजूद पिटुफिक स्पेस बेस अमेरिका को मिसाइल डिफेंस और स्पेस सर्विलांस में बड़ी मदद देता है. यहां से रूस, चीन और यूरोप की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाता है.
ग्रीनलैंड केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि आधुनिक खजानों के लिए भी जाना जाता है. यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स मौजूद हैं, जिन पर फिलहाल चीन का दबदबा है. ग्रीनलैंड मिलने से अमेरिका की चीन पर निर्भरता कम हो सकती है. इसके अलावा यहां यूरेनियम, लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हैं.
क्लाइमेट चेंज के कारण आर्कटिक में नए समुद्री व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं. इन रास्तों से एशिया, यूरोप और अमेरिका के बीच दूरी काफी कम हो सकती है. इन रूट्स को आर्कटिक सिल्क रोड कहा जा रहा है. ग्रीनलैंड इन व्यापारिक रास्तों का अहम केंद्र बन सकता है.
इसके साथ ही ग्रीनलैंड स्पेस और सैटेलाइट कंट्रोल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. अमेरिका स्पेस वॉरफेयर और सर्विलांस पर तेजी से फोकस बढ़ा रहा है. वहीं चीन और रूस भी आर्कटिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. अमेरिका नहीं चाहता कि ग्रीनलैंड पर चीन या रूस का प्रभाव बढ़े.