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India Daily

कोरोना के बाद अब इबोला वायरस.... कांगो-युगांडा में हाहाकार, 80 लोगों की मौत के बाद हेल्थ इमरजेंसी घोषित

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले इबोला के प्रकोप को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. इन देशों में स्थिति गंभीर बनी हुई है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
कोरोना के बाद अब इबोला वायरस.... कांगो-युगांडा में हाहाकार, 80 लोगों की मौत के बाद हेल्थ इमरजेंसी घोषित
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अफ्रीका के दो देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में लगातार बढ़ते मामलों और मौतों के बीच लोगों में डर का माहौल बन गया है. जिस कारण वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले इबोला के प्रकोप को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. इन देशों में स्थिति गंभीर बनी हुई है, स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण को रोकने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं.

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फिलहाल इसे वैश्विक महामारी आपातकाल घोषित करने से इनकार किया है. उनका कहना है कि बंडिबुग्यो वायरस से फैला यह संक्रमण महामारी (Pandemic) घोषत करने के मानकों पर खरा नहीं उतरता है. भले ही इसे महामारी नहीं माना जा रहा है लेकिन जब भी ऐसे किसी वायरस की बात होती तो कोरोना वायरस के दिनों का मंजर आंखों के सामने आ जाता है. कोरोना के उन दिनों में न जाने कितने लोगों की जान गई थी. अब इबोला वायरस के प्रभावों की तुलना कोरोना वायरस से की जा रही है.

80 लोगों की गई जान

ये वायरस कांगो और युगांडा में अपने पैर पसार रहा है. डीआरसी के इटुरी प्रांत के बुनिया, रवाम्पारा और मोंगब्वालू जैसे क्षेत्रों में अब तक 80 संदिग्ध मौतें, आठ लैब में पुष्टि किए गए मामले और 246 संदिग्ध संक्रमित पाए गए हैं. वहीं युगांडा की राजधानी कंपाला में भी दो नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है.

क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक बेहद खतरनाक और संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, वीर्य या पसीने के संपर्क में आने से फैलती है. यह बीमारी गंभीर संक्रमण पैदा करती है और कई मामलों में जानलेवा साबित होती है. समय पर इलाज और अलगाव बेहद जरूरी माना जाता है.

चुनौती बन रही सुरक्षा और दूरी

डीआरसी में स्वास्थ्य सेवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा और भौगोलिक दूरी है. इटुरी प्रांत लंबे समय से हिंसा और आतंकी गतिविधियों से प्रभावित रहा है. ऐसे में मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने और संक्रमण की निगरानी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण पर काबू नहीं पाया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.