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बांग्लादेश में अमेरिकी सेना की तैयारी, भारत के पड़ोस में ट्रंप का नया दांव; चीन पर भी बड़ा असर

अमेरिका नवंबर में बांग्लादेश के साथ बड़ा नौसैनिक अभ्यास करेगा. इसके साथ ही रक्षा सहयोग, आधुनिक हथियारों की पेशकश और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम तेज हो गया है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
बांग्लादेश में अमेरिकी सेना की तैयारी, भारत के पड़ोस में ट्रंप का नया दांव; चीन पर भी बड़ा असर
Courtesy: X

बंगाल की खाड़ी में अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है. बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने, नौसैनिक अभ्यास करने और आधुनिक हथियार देने की योजना के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव बड़ी वजह माना जा रहा है.

बंगाल की खाड़ी में बढ़ेगा अमेरिका का सैन्य सहयोग

अमेरिका ने घोषणा की है कि नवंबर में बांग्लादेश के साथ बड़ा नौसैनिक अभ्यास किया जाएगा. यह अभ्यास ऑपरेशन CARAT के तहत बंगाल की खाड़ी में आयोजित होगा. इसमें अमेरिका, बांग्लादेश, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों की नौसेनाएं शामिल होंगी. इससे पहले दोनों देशों की सेनाओं ने 'टाइगर लाइटनिंग 2026' नाम से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किया था. इस दौरान जंगल युद्ध और विशेष अभियान से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.

हथियारों और रक्षा समझौतों पर बढ़ी बातचीत

अमेरिका और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई अहम समझौतों पर बातचीत चल रही है. इनमें सैन्य जानकारी साझा करने से जुड़ा समझौता भी शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर, आधुनिक रडार सिस्टम और एयर डिफेंस मिसाइल देने का प्रस्ताव रखा है. इसके अलावा दोनों देश लॉजिस्टिक सहयोग समझौते पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी युद्धपोत और विमान जरूरत पड़ने पर बांग्लादेश के बंदरगाहों और एयरबेस का इस्तेमाल कर सकेंगे. अभी तक बांग्लादेश अपने रक्षा उपकरणों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर रहा है.

चीन को चुनौती

अमेरिका सिर्फ सैन्य सहयोग ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी बांग्लादेश को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में उसे 'Pax Silica' पहल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है. इस पहल का मकसद सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जरूरी खनिजों की नई सप्लाई चेन तैयार करना है, जिसमें चीन की भूमिका सीमित रहे. भारत पहले से इस पहल का हिस्सा है. ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका, भारत और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर दक्षिण एशिया में नई रणनीतिक साझेदारी बनाना चाहता है.