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India Daily

'अगर हमला हुआ तो...', अमेरिका से बातचीत को राजी हुआ ईरान, दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी

ईरान ने अमेरिका के साथ जंग खत्म करने के लिए मध्यस्थों के जरिए शर्तें रखी हैं. साथ ही, संभावित अमेरिकी हमले पर कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'अगर हमला हुआ तो...', अमेरिका से बातचीत को राजी हुआ ईरान, दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी
Courtesy: @azucenau

ईरान ने अमेरिका के साथ तनाव और सैन्य संघर्ष समाप्त करने के लिए एक बार फिर कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की इच्छा जताई है. ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने एक साक्षात्कार में पुष्टि की कि तेहरान ने मध्यस्थ देशों के सामने अपनी शर्तें रखी हैं, जिनके आधार पर वह वाशिंगटन के साथ दोबारा सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार है.

बातचीत के लिए ईरान की मुख्य शर्तें

ईरान की प्राथमिक शर्तों में सभी मोर्चों पर जारी सैन्य संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी धन और संपत्तियों को मुक्त करना तथा देश के खिलाफ लगी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना शामिल है. रेजाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ये बातें अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं और तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.

संभावित अमेरिकी हमले पर सेना की कड़ी चेतावनी

इस बीच ईरान की सरकारी मीडिया और केंद्रीय सैन्य कमान ने कहा है कि अमेरिका क्षेत्र के कुछ देशों के साथ मिलकर पुनः सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है. इसके जवाब में ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि कोई हमला होता है, तो मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके हितों को निशाना बनाया जाएगा. अमेरिका का सहयोग करने वाले क्षेत्रीय देशों को भी इस युद्ध का पक्ष माना जाएगा.

क्षेत्रीय शांति और अन्य विवादों को सुलझाने की इच्छा

कूटनीतिक और सैन्य रुख को स्पष्ट करने के साथ-साथ ईरान ने क्षेत्र में शांति बहाली की बात कही है. रेजाई ने कहा कि उनका देश सऊदी अरब और यमन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने में सहयोग करना चाहता है. इसके अलावा, तेहरान पड़ोसी देशों अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बने तनाव और संघर्ष को खत्म कराने में भी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.