नई दिल्ली: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवाद में घिर गई है. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने भारत सहित 60 व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए नए टैरिफ के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है. राज्यों का कहना है कि यह फैसला व्यापार कानून के दायरे से बाहर जाकर लिया गया है. यह मामला न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर किया गया है. याचिका में ट्रंप प्रशासन की उस नीति को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए आयातित वस्तुओं पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया है. इस कानूनी लड़ाई को ट्रंप की व्यापार नीति की नई परीक्षा माना जा रहा है.
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन पहले अदालतों से झटका मिलने के बावजूद नए कानूनी आधार का सहारा लेकर वही व्यापक आयात शुल्क दोबारा लागू करने की कोशिश कर रहा है. राज्यों का आरोप है कि धारा 301 का उद्देश्य किसी विशेष देश या उद्योग की कथित अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर कार्रवाई करना है, न कि बड़े पैमाने पर सभी व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक टैरिफ लगाना.
विवादित टैरिफ 24 जुलाई को घोषित किए गए थे और ये भारत, यूरोपीय संघ समेत 60 व्यापारिक साझेदारों से आने वाले आयात पर लागू किए गए हैं. प्रशासन के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के निर्यात को रोकने के लिए कदम उठाए, उन्हें राहत दी गई. इसी आधार पर भारत के लिए टैरिफ दर 12.5 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई.
नए टैरिफ के दायरे से कुछ वस्तुओं को बाहर रखा गया है. इनमें तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अमेरिका मेक्सिको कनाडा समझौते के तहत शुल्क मुक्त श्रेणी में आने वाले उत्पाद शामिल हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन टैरिफ का उद्देश्य व्यापारिक साझेदारों को जबरन श्रम से जुड़े आयात पर सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने नए टैरिफ का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका लंबे समय से जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू करता रहा है. उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार भी इसी तरह के सख्त मानक अपनाएं और ऐसे उत्पादों के व्यापार पर प्रभावी रोक लगाएं.
ट्रंप प्रशासन इससे पहले भी व्यापक वैश्विक टैरिफ को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुका है. अमेरिकी अदालतें पहले अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को अवैध ठहरा चुकी हैं. इसके बाद प्रशासन ने धारा 301 का सहारा लिया, जिसे अब 25 राज्यों ने अदालत में चुनौती दी है. इस मामले का फैसला ट्रंप की व्यापार नीति की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है.