यमन के हुतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद समेत कई अन्य जगहों पर बड़ा हमला किया. रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हुतियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का आग्रह किया था और अमेरिकी सेना ने हमले के लिए तैयारी भी कर ली थी.
रिपोर्ट के मुताबिक हमले की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन के हुतियों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना फैसला आखिरी समय में बदल दिया.
यमन में ईरान समर्थित हुतियों के बढ़ते प्रभाव के बीच सऊदी अरब ने अमेरिका से सैन्य मदद की मांग की थी. रॉयटर्स और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बातचीत में हुतियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का आग्रह किया. हुतियों ने हाल के दिनों में सऊदी समर्थित यमनी बलों के खिलाफ अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं और लाल सागर के आसपास रणनीतिक इलाकों में आगे बढ़े हैं.
अमेरिकी प्रशासन ने कथित तौर पर हुतियों के ठिकानों और संभावित लक्ष्यों की पहचान कर ली थी. अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी की गई, लेकिन अंतिम चरण में राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले को रोकने का फैसला किया. रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रशासन के भीतर मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य भूमिका और बढ़ाने को लेकर मतभेद थे.
हुतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियां रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ा रही हैं. यह मार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है तथा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है. रॉयटर्स के अनुसार, हुतियों की हालिया बढ़त से सऊदी अरब के उस वैकल्पिक तेल निर्यात मार्ग पर भी दबाव बढ़ा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से बचने में मदद करता है.
यमन की सऊदी समर्थित सरकार के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने भी ट्रंप से बातचीत कर अमेरिकी समर्थन की मांग की थी. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने सीधे सैन्य समर्थन का आश्वासन नहीं दिया. हुतियों के खिलाफ सीधे हमले से पीछे हटने के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए 48 F-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है. इस सौदे की अनुमानित कीमत 24.3 अरब डॉलर है और इसे आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी.