नई दिल्ली: ब्रिटेन की संसद में दिया गया एक भाषण इन दिनों राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है. सांसद रूपर्ट लोवे ने कथित ग्रूमिंग गैंग मामलों से जुड़ी पीड़ितों की गवाहियों का उल्लेख करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. उनके बयान के बाद एक बार फिर उन मामलों पर ध्यान केंद्रित हो गया है, जो वर्षों से सार्वजनिक बहस और जांच का हिस्सा रहे हैं.
लोवे ने दावा किया कि स्वतंत्र जांच के दौरान सामने आई गवाहियां केवल अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उन संस्थागत कमियों की भी तस्वीर पेश करती हैं, जिनके कारण कई पीड़ितों को समय पर सुरक्षा नहीं मिल सकी. उनके संबोधन ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह नई चर्चा को जन्म दिया है.
एक पीड़िता ने बताया 'उसने अपनी पैंट उतारी, मेरे साथ यौन संबंध बनाए. फिर उसने एक खाली बोतल उठाई और उसे जबरदस्ती मेरे अंदर डाल दिया. उसने बोतल का शीशा तोड़ दिया. उस समय मेरी उम्र लगभग 12 या 13 वर्ष थी.'
लोवे द्वारा पढ़े गए एक अन्य बयान में कहा गया है: 'मुझे उन आदमियों ने पकड़ रखा था और बारी-बारी से मेरा बलात्कार किया, मेरे हाथ-पैर भी बारी-बारी से दबाए रखे. हमला खत्म होने के बाद, उन आदमियों ने मुझे बार-बार पीटा, मुझे ढूंढ निकालने, जान से मारने और मेरे प्रियजनों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी, अगर मैंने कभी किसी को भी इस घटना के बारे में बताया.'
लोवे ने उन गवाहियों का भी हवाला दिया जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ अपराधियों द्वारा नस्ल और धर्म का इस्तेमाल पीड़ितों को अपमानित करने, अलग-थलग करने और उन पर नियंत्रण रखने के लिए किया गया था.
जांच सुनवाई के दौरान एक पीड़िता ने कहा कि 'लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं जिनसे यह संकेत मिलता था कि श्वेत लड़कियों, ईसाई लड़कियों को कम नैतिक या निम्न मूल्यों वाली माना जाता था, जबकि कुछ पुरुषों द्वारा मुस्लिम लड़कियों को गरिमापूर्ण और उच्च नैतिक स्तर वाली बताया जाता था. इन तुलनाओं का इस्तेमाल मेरे साथ किए गए व्यवहार को उचित ठहराने और मुझे और अधिक अपमानित और नियंत्रित करने के लिए किया जाता था.'
एक अन्य गवाही में बताया गया कि दुर्व्यवहार के दौरान पीड़िता के ईसाई धर्म का कथित तौर पर मजाक उड़ाया गया. 'धर्म से जुड़ी मेरी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मैं एक ईसाई के रूप में पली-बढ़ी थी. मैं अपना क्रॉस पहनती थी क्योंकि यह मेरे लिए बहुत खास था. इसका इस्तेमाल मुझे तोड़ने के लिए किया गया. उन्होंने कहा, 'अब तुम्हारा ईश्वर कहां है? क्या तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें त्याग दिया है?'
ब्रिटिश सांसद ने एक महिला का बयान भी उद्धृत किया, जिसने आरोप लगाया था कि उसके कुछ हमलावर पुलिस अधिकारी थे. गवाही में कहा गया है, 'दुर्व्यवहार के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया.'
अन्य विवरणों में दुर्व्यवहार की भयावहता और पीड़ितों द्वारा संस्थानों की ओर से हस्तक्षेप करने में विफलता का वर्णन किया गया है. एक गवाह ने कहा: 'यह तब शुरू हुआ जब मैं 13 साल की थी. तीन साल में लगभग छह या सात सौ अलग-अलग पुरुषों ने मेरा बलात्कार किया.'
उन्होंने एक महिला की गवाही का भी हवाला दिया, जिसने आरोप लगाया कि उसने 15-20 महिलाओं को पिंजरों में बंद देखा और खुद के साथ हुए अत्यधिक दुर्व्यवहार का वर्णन किया. एक अन्य पीड़िता ने कहा 'मेरे आस-पास कई पुरुष थे, जो न तो भयभीत थे, न ही घृणा से भरे थे, न ही मदद कर रहे थे, बल्कि वीडियो बना रहे थे और हंस रहे थे, शर्त लगा रहे थे कि क्या कुत्ता सचमुच मेरा बलात्कार कर सकता है या नहीं. और हाँ, मेरा बलात्कार एक कुत्ते ने किया. उस आदमी ने मेरा चेहरा पकड़ लिया, मेरी आंखों में सीधे घूरता रहा, और वह मुझे टूटते हुए देखना चाहता था. और उसने ऐसा कर दिखाया'.
ब्रिटेन में, 'ग्रूमिंग गैंग्स' शब्द का प्रयोग आमतौर पर उन मामलों के लिए किया जाता है जिनमें कमजोर बच्चों और किशोरों को कई अपराधियों द्वारा लंबे समय तक बहला-फुसलाकर, तस्करी करके, डरा-धमकाकर, नशीली दवाएं देकर या दुर्व्यवहार करके प्रताड़ित किया जाता है.
यह शब्द रोदरहम, रोशडेल और ओल्डहम जैसे शहरों में हुई जांचों के बाद प्रचलित हुआ, जिनमें संगठित बाल यौन शोषण और पीड़ितों की सुरक्षा में पुलिस, परिषदों और सामाजिक सेवाओं की बड़ी नाकामियां सामने आईं. ब्रिटेन में चल रही वैधानिक जांच में कहा गया है कि वह 'इंग्लैंड और वेल्स में ग्रूमिंग गैंग्स द्वारा बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार की जांच कर रही है.