नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक झटका लगा है. UAE ने पाकिस्तान से अपना 3.5 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत वापस मांग लिया है, जिसके बाद पाकिस्तान ने इसी महीने यह रकम चुकाने का फैसला किया है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई ने अपने फंड्स को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया है, जिससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है.
जानकारी के अनुसार यह राशि State Bank of Pakistan के पास एक सुरक्षित जमा के रूप में रखी गई थी. यूएई पहले इस कर्ज को समय-समय पर आगे बढ़ाता रहा था, लेकिन अब उसने इसकी तत्काल वापसी की मांग कर दी है. पाकिस्तान इस रकम पर करीब 6 प्रतिशत ब्याज भी चुका रहा था.
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान इस महीने के अंत तक यह पूरी राशि अबू धाबी को लौटा देगा. चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान को लगभग 12 अरब डॉलर के बाहरी जमा की जरूरत थी, जिसमें सऊदी अरब, चीन और यूएई का योगदान शामिल था.
हालांकि पाकिस्तान के पास इस समय करीब 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे वह फिलहाल इस कर्ज को चुकाने में सक्षम है. लेकिन आने वाले समय में पाकिस्तान को बाहरी वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है.
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा कारण पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुआ रणनीतिक रक्षा समझौता भी माना जा रहा है. इस समझौते के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब का खुलकर समर्थन किया, जिससे यूएई नाराज हो गया.
बताया जा रहा है कि यूएई ने पहले भी 2 अरब डॉलर के रोलओवर को सीमित समय के लिए बढ़ाया था लेकिन अब उसने पूरा कर्ज वापस लेने का फैसला कर लिया है. इस कदम को पाकिस्तान के लिए दोहरी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
एक तरफ उसे सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना है, वहीं दूसरी तरफ यूएई जैसे पुराने सहयोगी के साथ आर्थिक संतुलन भी संभालना है. इस स्थिति में पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं.