नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है. इस बीच ऐसी खबरें सामने आई हैं कि इजरायल जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है. हालांकि फिलहाल इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे इस संघर्ष में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है. माना जा रहा है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले इजरायल अमेरिका की रणनीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का इंतजार कर रहा है.
रिपोर्टों के अनुसार यरुशलम के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य तनाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है. यदि वॉशिंगटन किसी संयुक्त अभियान का फैसला करता है तो इजरायल भी उसका हिस्सा बन सकता है.
एक इजरायली अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यदि हालात की मांग हुई तो इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा. अधिकारी ने कहा कि पहले भी इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कोई भी पक्ष दोबारा व्यापक युद्ध नहीं चाहता, लेकिन सुरक्षा से जुड़े खतरों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
दूसरी ओर इजरायली रक्षा बल ने फिलहाल संतुलित रुख अपनाया है. सेना के अधिकारियों का कहना है कि इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सीधे सैन्य टकराव में शामिल होने की कोई तत्काल योजना नहीं है. सेना का आकलन है कि फिलहाल ईरान भी इजरायल को इस संघर्ष में सीधे घसीटना नहीं चाहता. इसके बावजूद किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार रखी गई है.
इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कारोबारी जहाजों पर कथित ईरानी हमलों के जवाब में की गई. यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत में काफी समय व्यर्थ गया और अब अमेरिका आगे वार्ता जारी रखने के पक्ष में नहीं है. ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इजरायल के रुख पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी.