रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर की बड़ी कूटनीतिक कोशिशों के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में पिछले दो दिनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच के घातक हमलों पर फिलहाल विराम लग गया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन तेहरान के साथ तकनीकी और कूटनीतिक बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, इस संघर्ष-विराम और शांति वार्ता के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल अभी भी मंडरा रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बेहद गहरी है.
सूत्रों के मुताबिक, कूटनीतिक बातचीत का अगला दौर 18 जुलाई को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है लेकिन हालिया सैन्य झड़पों और अमेरिका द्वारा ईरान का तेल बेचने का लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद इस वार्ता की सफलता पर सवाल उठने लगे हैं. ईरान ने अमेरिका पर पूर्व में संघर्ष-विराम के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है.
सैन्य विश्लेषक एलेक्स अल्फिर्राज शीर्स के अनुसार, इस बातचीत से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद कम है. उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान भी अमेरिका और इजरायल ने ईरान को निशाना बनाया है, जिससे तेहरान का अविश्वास और गहरा गया है. जब तक दोनों पक्ष ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक यह प्रक्रिया सिर्फ एक औपचारिक दिखावा बनकर रह जाएगी.
शांति वार्ताओं के बीच ईरान के 'इस्लामिक रेवलूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के टॉप कमांडर ब्रिगेडियर-जनरल अहमद वाहिदी ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का प्रतिशोध लेने का अपना संकल्प दोहराया. वाहिदी ने अमेरिकी सेना को 'बच्चों की हत्यारी' बताते हुए चेतावनी दी कि इस कायरतापूर्ण कृत्य के दोषियों को सजा देना और शहीदों का बदला लेना उनकी कभी न भूलने वाली न्यायसंगत मांग है.