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India Daily

'टेक्स्ट अभी फाइनल नहीं है…', ट्रंप के शांति समझौते को खामेनेई की मंजूरी मिलने के दावे के बाद ईरान का बड़ा बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर होने वाले हमले को फिलहाल रोक दिया है. उनका कहना है कि ईरान की लीडरशिप ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

Shilpa Shrivastava
'टेक्स्ट अभी फाइनल नहीं है…', ट्रंप के शांति समझौते को खामेनेई की मंजूरी मिलने के दावे के बाद ईरान का बड़ा बयान
Courtesy: AI

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर होने वाले हमले को फिलहाल रोक दिया है. उनका कहना है कि ईरान की लीडरशिप ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें सीजफायर बढ़ाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और 60 दिन तक बातचीत करने की बात शामिल है. लेकिन दूसरी तरफ ईरान ने साफ कहा है कि अभी तक किसी भी समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है.

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने इस समझौते को मंजूरी दे दी है. उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही दोनों देश इस पर साइन कर सकते हैं और उसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लिखा कि बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और इसी वजह से उन्होंने हमले का फैसला टाल दिया. उनका कहना है कि इस समझौते में कई बड़े देश भी शामिल हैं और सभी ने इसे सिद्धांत रूप में मंजूरी दे दी है.

ईरान ने क्या कहा?

ईरान की न्यूज एजेंसी ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह सही नहीं माना. उनके मुताबिक, अभी तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते का कोई फाइनल ड्राफ्ट मंजूर नहीं हुआ है. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि बातचीत चल रही है और आगे इस पर विचार किया जा सकता है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपने रुख बदलता रहा है, जिससे समझौता करना मुश्किल हो रहा है.

समझौते में क्या-क्या शामिल?

इस प्रस्तावित समझौते का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और अमेरिका की तरफ से लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटाना है. इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत की जाएगी. हालांकि, ट्रंप ने भरोसा जताया है कि समझौता जल्द हो सकता है, लेकिन ईरान की तरफ से साफ जवाब नहीं आया है. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि दोनों देशों के बीच कब तक कोई पक्का समझौता होगा.