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Nepal PM: सुशीला कार्की ने ली नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ, बनी पहली महिला पीएम

नेपाल में हाल के दिनों में तेजी से बढ़ते राजनीतिक संकट ने एक अलग ही मोड़ ले लिया है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के पद की शपथ ले ली है.

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Edited By: Antima Pal
Nepal PM: सुशीला कार्की ने ली नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ, बनी पहली महिला पीएम
Courtesy: social media

Nepal PM: नेपाल में हाल के दिनों में तेजी से बढ़ते राजनीतिक संकट ने एक अलग ही मोड़ ले लिया है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं. वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं.

सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का फैसला राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सुशीला कार्की और जनरेशन-जेड यानी Gen-Z आंदोलन के नेताओं के बीच लंबी चर्चाओं के बाद लिया गया. सुशीला कार्की ने पद की शपथ ले ली है और अब संसद को भंग करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह कदम देश में फैले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है, जिनमें अबतक कम से कम 51 लोगों की मौत हो चुकी है.

कौन हैं सुशीला कार्की?

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर में हुआ है. उन्होंने राजनीति विज्ञान और कानून में पढ़ाई की और नेपाली बार एसोसिएशन में वरिष्ठ वकील बनीं. 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में एड-हॉक जज बनाया गया, जो बाद में स्थायी हो गया. 2016 में वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी.

उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार और न्यायिक सुधारों पर जोर दिया गया. हालांकि 2017 में एक इम्पीचमेंट मोशन उनके खिलाफ लाया गया, लेकिन जन दबाव और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से वह वापस ले लिया गया. 65 साल की आयु सीमा पूरी होने पर उन्होंने 2017 में इस्तीफा दे दिया. अब 73 वर्ष की उम्र में, वे राजनीतिक तटस्थता के कारण जेन-ज़ी युवाओं की पसंद बनी हैं.

सोशल मीडिया पर बैन लगाने के बाद शुरू हुआ विवाद

यह विवाद नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे से शुरू हुआ. ओली सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाने का फैसला किया, जिससे युवा वर्ग में भारी आक्रोश फैल गया. जेन-जेड आंदोलन, जो मुख्य रूप से बिना किसी औपचारिक नेतृत्व के चल रहा है, ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई.

कम से कम 22 लोग मारे गए

प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू और अन्य शहरों में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और राजनीतिक दलों के मुख्यालयों पर हमले किए. इससे हिंसा भड़क गई, जिसमें पुलिस और सेना को उतारना पड़ा. कर्फ्यू लगाने के बावजूद स्थिति बेकाबू हो गई. बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध 8 सितंबर की रात को हटा लिया गया था.

'कार्की ईमानदार, निडर और राजनीतिक दलों से अलग'

Gen-Z नेताओं ने डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर वोटिंग की और कार्की का नाम चुना. उन्होंने कहा कि कार्की ईमानदार, निडर और राजनीतिक दलों से अलग हैं. एक युवा नेता ओजस्वी ने कहा, 'कार्की का चयन इसलिए क्योंकि वे राष्ट्र निर्माण में मदद करेंगी. हम संसद भंग और नए चुनाव चाहते हैं.' राष्ट्रपति पौडेल ने प्रमुख राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी दी. सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल भी चर्चाओं में शामिल रहे.