नई दिल्ली: तीन हफ्ते पहले शुरू हुआ ईरान और इजराइल के बीच सैन्य टकराव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. पहले जहां यह संघर्ष सीमित हमलों तक था, वहीं अब ऊर्जा संसाधन इसका मुख्य निशाना बन गए हैं.
हाल के हमलों में गैस और तेल उत्पादन केंद्रों को टारगेट किया गया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मच गई. इस बदलाव ने संकेत दे दिया है कि अब यह युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है.
हाल के हमलों में सबसे बड़ा निशाना साउथ पार्स गैस फील्ड बना, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार माना जाता है. यह ईरान और कतर के बीच साझा है और वैश्विक LNG सप्लाई की रीढ़ है. इस पर हमला होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ठिकानों को नुकसान पहुंचना केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट को जन्म देता है.
BREAKING: Middle East tensions are spiraling. Israel has struck Iran’s South Pars gas field, which is the world’s largest natural gas field. Oil just jumped to $108/barrel!
Israel just warned that it will destroy all bridges on Lebanon’s Litani River. This is a major escalation.… pic.twitter.com/zKWRtZux8H— Ed Krassenstein (@EdKrassen) March 18, 2026Also Read
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इजराइल के हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब, कतर और यूएई के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया. अरामको की रिफाइनरी, कतर के रास लाफान और यूएई के हबशन गैस प्लांट पर हमले हुए. हालांकि, कई हमले रोके गए, लेकिन इसने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है. यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर ऊर्जा संरचनाएं सीधे युद्ध का हिस्सा बनी हैं.
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण है क्योंकि वह LNG के लिए काफी हद तक कतर पर निर्भर है. गैस की आपूर्ति बाधित होने से उर्वरक उद्योग, परिवहन और घरेलू गैस नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं. इसके साथ ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ना तय है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले लंबे समय तक असर डालते हैं क्योंकि इन्हें ठीक करने में वर्षों लग सकते हैं. 2003 के इराक युद्ध के बाद भी ऊर्जा उत्पादन सामान्य होने में काफी समय लगा था. अब जिस तरह से तेल और गैस को निशाना बनाया जा रहा है, उससे साफ है कि आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है. यह संकेत है कि आने वाले समय में यह संघर्ष और भी व्यापक हो सकता है.