नई दिल्ली: अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में एयर स्ट्राइक की. सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिकी ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपनी हिरासत में ले लिया. इसके बाद निकोलस मादुरो को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
निकोलस मादुरो का सफर वेनेजुएला की राजनीति में एक असामान्य कहानी के रूप में देखा जाता है. वह एक साधारण बस चालक से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे. हाल के घटनाक्रमों के बाद उनका नाम फिर से वैश्विक चर्चा में है, लेकिन उनका राजनीतिक सफर दशकों पहले शुरू हो चुका था.
निकोलस मादुरो का जन्म वर्ष 1962 में वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हुआ. उनके पिता एक यूनियन नेता थे, इसलिए मादुरो का बचपन से ही श्रमिक आंदोलनों और राजनीति से जुड़ाव रहा. स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि छात्र राजनीति में दिखने लगी. वह अपने हाई स्कूल के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे. यहीं से उनके नेतृत्व कौशल की पहचान बनने लगी.
पढ़ाई पूरी करने के बाद मादुरो ने बस चालक के रूप में काम करना शुरू किया. वह काराकास की सार्वजनिक परिवहन सेवा में बस चलाते थे. इसी दौरान उन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठानी शुरू की. उस समय जिस मेट्रो कंपनी में वह काम करते थे, वहां यूनियन बनाना मना था. इसके बावजूद मादुरो ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक अनौपचारिक यूनियन बनाई, जो बाद में श्रमिक संगठनों के लिए एक उदाहरण बनी.
राजनीतिक रूप से मादुरो पर सबसे गहरा असर हूगो चावेज का पड़ा. 1990 के दशक की शुरुआत में वह रिवॉल्यूशनरी बोलीवेरियन मूवमेंट-200 से जुड़े. यह संगठन हूगो चावेज के विचारों से प्रेरित था और सामाजिक बदलाव की बात करता था. 1992 में चावेज ने तख्तापलट की असफल कोशिश की, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. इस दौरान मादुरो जैसे समर्थक उनके लिए जनसमर्थन जुटाने में लगे रहे.
जेल से बाहर आने के बाद हूगो चावेज ने 1997 में फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनाई. मादुरो इसमें सक्रिय रूप से शामिल रहे. 1998 के चुनाव में चावेज की जीत के बाद मादुरो का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा. 1999 में उन्हें संविधान सभा का सदस्य चुना गया, जहां नए संविधान के निर्माण में उन्होंने भूमिका निभाई.
आगे चलकर मादुरो नेशनल असेंबली के सदस्य बने और उसके अध्यक्ष भी रहे. वर्ष 2006 में हूगो चावेज ने उन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया. विदेश मंत्री रहते हुए मादुरो ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वेनेजुएला की मुखर नीति रखी. 2012 में जब चावेज गंभीर रूप से बीमार थे, उन्होंने मादुरो को उपराष्ट्रपति बनाया.
दिसंबर 2012 में चावेज ने सार्वजनिक रूप से मादुरो को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया. मार्च 2013 में चावेज के निधन के बाद मादुरो को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया और बाद में चुनाव जीतकर वह वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने. इस तरह एक बस ड्राइवर से शुरू हुआ सफर देश के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचा.