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India Daily

व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा तय, पीएम मोदी के निमंत्रण पर दिसंबर में दो दिवसीय दौरे पर आएंगे रूस के प्रेसिडेंट

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत की यात्रा पर आएंगे. यह दौरा पीएम मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा तय, पीएम मोदी के निमंत्रण पर दिसंबर में दो दिवसीय दौरे पर आएंगे रूस के प्रेसिडेंट
Courtesy: @mog_russEN x account

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत की यात्रा पर आएंगे. यह जानकारी रूसी मीडिया ने क्रेमलिन के हवाले से दी है. यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है. हाल के महीनों में भारत और रूस के संबंध और मजबूत हुए हैं, खासकर तब से जब अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर दंडात्मक शुल्क लगाए थे.

पुतिन की इस यात्रा की चर्चा अगस्त में ही शुरू हो गई थी, जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मास्को गए थे. उस दौरान पुतिन की भारत यात्रा पर सहमति बनी थी, लेकिन तारीखों की घोषणा नहीं की गई थी. इसके बाद पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी. दोनों नेताओं ने पुतिन की लिमोजिन में करीब एक घंटे तक बातचीत की थी.

भारत और रूस बीच कैसे हैं संबंध?

भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में रूस यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत को रियायती दर पर तेल बेचता रहा है, जिससे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी और भी मजबूत हुई है. अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर आपत्ति जताई थी और भारत के खिलाफ शुल्क बढ़ाने की कार्रवाई भी की थी. इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखा है.

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या लगाया था आरोप?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना की थी. ट्रंप ने कहा था कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से रूस को युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है. हालांकि भारत ने हमेशा कहा है कि उसकी तेल खरीदारी केवल राष्ट्रीय हित और ऊर्जा आवश्यकता के आधार पर होती है.

किन मुद्दों पर बातचीत की है उम्मीद?

पुतिन की यह यात्रा भारत और रूस के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का एक और महत्वपूर्ण चरण होगी. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, परमाणु ऊर्जा, व्यापार बढ़ोतरी और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत होने की उम्मीद है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा रणनीतिक सहयोग भी इस यात्रा से मजबूत होने की संभावना है.