नई दिल्ली: ताजिकिस्तान में अफगानिस्तान की सीमा के पास सोने की खदान में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों पर एक घातक ड्रोन हमला हुआ जिसमें तीन चीनी नागरिकों की मौत हो गई. इस घटना ने पूरे मध्य एशिया में तनाव बढ़ा दिया है क्योंकि यह हमला सीधे सीमा पार से किए जाने का दावा किया जा रहा है. ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह हमला एक UAV से किया गया था जिसमें ग्रेनेड और विस्फोटक लोड थे.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक बुधवार रात को ड्रोन ने खटलोन इलाके में स्थित एलएलसी शोहिन एसएम कंपनी के वर्कर्स कैंप को निशाना बनाया था. यह इलाका अफगानिस्तान की सीमा से बेहद करीब है और यहां कई चीनी कंपनियां माइनिंग और नेचुरल रिसोर्स के प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं. एलएलसी शोहिन एसएम ताजिकिस्तान और चीन का एक जॉइंट वेंचर है जिसमें निवेश और तकनीक चीन की कंपनी Tibet Huayu Mining से आती है.
यह कंपनी खटलोन प्रांत में सोने की खदान चलाती है और इसे ताजिकिस्तान के सबसे बड़े स्वर्ण भंडारों में गिना जाता है. ताजिकिस्तान ने कहा है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने की उसकी कोशिशों के बावजूद अफगानिस्तान में मौजूद क्रिमिनल और आतंकी ग्रुप्स की गतिविधियां अब भी जारी हैं. ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है और अफगान अधिकारियों से कहा है कि वे अपने सीमा क्षेत्र को सुरक्षित रखें.
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल के महीनों में इस क्षेत्र में तनाव कई बार बढ़ चुका है. ताजिकिस्तान ने एक सप्ताह पहले भी अपने इलाके में अफगानिस्तान के दो संदिग्ध ड्रग स्मगलरों को ड्रोन से मार गिराया था. अगस्त में ताजिक गार्ड्स और तालिबान लड़ाकों के बीच फायरिंग भी हुई थी जिससे दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
चीनी इंजीनियर क्षेत्र में माइनिंग और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में शामिल थे और इनका काम पहाड़ी और सीमा क्षेत्रों में था. यह हमला चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिए भी चिंता का विषय बन गया है क्योंकि चीन ने ताजिकिस्तान में भारी निवेश कर रखा है. इस घटना ने ताजिकिस्तान को चीन और रूस के बीच एक संवेदनशील स्थिति में खड़ा कर दिया है जहां उसे सुरक्षा और निवेश दोनों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
यह हमला कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन की बैठक से ठीक पहले हुआ है जिससे साफ है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा स्थिरता आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बनने वाली है. चीन ने इस हमले पर गहरी चिंता जताई है और ताजिकिस्तान के साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने की बात कही है.