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India Daily

नेपाल में चुनावी हलचल, 'Gen Z' की लहर में बालेन शाह की पार्टी क्या लहरा पाएगी जीत का परचम? पुरानी ताकतें पस्त

नेपाल के हालिया आम चुनाव में मतगणना के शुरुआती रुझानों ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं. पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) जबरदस्त बढ़त में है.

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Edited By: Reepu Kumari
नेपाल में चुनावी हलचल, 'Gen Z' की लहर में बालेन शाह की पार्टी क्या लहरा पाएगी जीत का परचम? पुरानी ताकतें पस्त
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: नेपाल की राजनीति में ताजा हवा का संकेत मिल रहा है. पिछले साल सितंबर में युवाओं के हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंका था. उसके बाद राष्ट्रपति ने संसद भंग की और सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया. अब 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव में Gen Z की आवाज गूंज रही है.

भ्रष्टाचार, सुशासन और पुरानी व्यवस्था से मुक्ति के नारे के साथ युवा नेता बालेन शाह की पार्टी आरएसपी ने पारंपरिक दलों को कड़ी टक्कर दी है. मतदाताओं ने बदलाव की मांग की है.

शुरुआती रुझानों में आरएसपी की मजबूत पकड़

मतगणना शुरू होते ही तस्वीर साफ होने लगी. 165 प्रत्यक्ष सीटों में से अब तक 61 पर गिनती हुई, जिसमें आरएसपी ने 52 सीटों पर बढ़त बनाई. नेपाली कांग्रेस सिर्फ 5 और सीपीएन-यूएमएल 4 पर आगे हैं. कई पूर्व प्रधानमंत्री, उप-प्रधानमंत्री और मंत्री भी पीछे चल रहे हैं. यह रुझान बताता है कि युवा मतदाता पुरानी पार्टियों से नाराज हैं और नई ताकत को मौका देना चाहते हैं.

बालेन शाह: रैपर से प्रधानमंत्री उम्मीदवार तक

35 साल के बालेन शाह, जो पहले रैपर थे और फिर काठमांडू के मेयर बने, अब आरएसपी के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं. उन्होंने जनवरी में मेयर पद छोड़कर झापा-5 से चुनाव लड़ा, जहां वे सीधे ओली से भिड़े. शुरुआती गिनती में बालेन ओली से काफी आगे हैं. उनकी पार्टी 2022 में बनी थी, लेकिन इस बार युवाओं का भारी समर्थन मिला. भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पीढ़ीगत बदलाव उनके मुख्य वादे हैं.

पुरानी पार्टियां बैकफुट पर

केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे दिग्गज भी मैदान में थे. ओली भक्तपुर से वोट डालने पहुंचे, लेकिन रुझान उनके खिलाफ हैं. नेपाली कांग्रेस के गगन थापा धनुषा-4 से लड़े. दोनों पार्टियां पिछले साल के विरोध में घिरी थीं. Gen Z ने भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और सुशासन की कमी पर सवाल उठाए थे. अब लगता है कि मतदाताओं ने उनकी बात सुनी है.

चुनाव की खास बातें और अंतरराष्ट्रीय नजर

कुल 1 करोड़ 89 लाख मतदाताओं में से करीब 60% ने हिस्सा लिया. 275 सीटों (165 प्रत्यक्ष, 110 समानुपातिक) के लिए 65 दलों के हजारों उम्मीदवार लड़े. चुनाव शांतिपूर्ण रहा, 10,967 बूथों पर मतदान हुआ. भारत ने भी चुनाव की सफलता पर बधाई दी, स्थिर सरकार की उम्मीद जताई. नेपाल में 18 साल में 14 सरकारें बदलीं, अब युवा बदलाव ला सकते हैं.