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'नई दिल्ली किसी से भी तेल खरीदने के लिए आजाद है', भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रूस का पहला रिएक्शन

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तय हो चुका है. हालांकि कुछ रिपोर्ट में इसके पीछे रूस के साथ तेल व्यापार खत्म करने की बात कही जा रही है. लेकिन रूस ने इन दावों पर भी अपनी राय रखी है.

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Edited By: Shanu Sharma
'नई दिल्ली किसी से भी तेल खरीदने के लिए आजाद है', भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रूस का पहला रिएक्शन
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता फाइनल हो चुका है. डोनाल्ड ट्रंप ने दिल्ली पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को 18 प्रतिशत कर दिया है. हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया. जिसकी वजह से भारत पर से अतिरिक्त टैरिफ हटा दिए गए. 

रूस ने अब भारत के साथ अपने तेल व्यापार पर ब्यान दिया है. रूस की ओर से कहा गया कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए पूरी  तरह से आजाद है. रूस से भारत के साथ तेल व्यापार पर जब सवाल किए गए तो क्रेमलिन ने कहा कि मॉस्को अकेला देश नहीं है जो दिल्ली को कच्चा तेल सप्लाई करता है और भारत अपने कच्चे तेल के लिए शुरू से ही अलग-अलग देशों पर निर्भर है. 

भारत के साथ रूस का व्यापार

क्रेमलिन ने भारत के साथ तेल व्यापार को लेकर कहा कि हम, दूसरे सभी इंटरनेशनल एनर्जी एक्सपर्ट्स की तरह, इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सप्लाई करने वाला अकेला देश नहीं है. भारत हमेशा से इन प्रोडक्ट्स को दूसरे देशों से खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नहीं दिख रहा है. हालांकि इससे एक दिन पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस को भारत से रूसी तेल की खरीद बंद करने के बारे में कोई बयान नहीं मिला है.

अमेरिका ने भारत पर से क्यों हटाया टैरिफ?

अमेरिका और भारत के बीच काफी लंबे समय से व्यापार वार्ता चल रही थी. कई कोशिशों के बाद भी सफलता नहीं मिल पाई थी, हालांकि भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर के आने के बाद से स्थिति में सुधार आई है. इसके अलावा भारत ने कुछ दिनों पहले यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड समझौता भी फाइनल कर लिया, जिससे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका लगा था. कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि यूरोप और भारत के बीच बढ़ती दोस्ती से अमेरिका को ज्यादा नुकसान ना हो, इसलिए भी ट्रंप ने अपने कदम पीछे खिंच लिए हैं.