टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारत और पाकिस्तान क्रिकेट को लेकर एक बार फिर तनाव देखा जा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि उनकी टीम ग्रुप स्टेज में भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी. यह टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है. पाकिस्तान के इस फैसले ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC), प्रसारकों और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच नई बहस छेड़ दी है.
इस्लामाबाद में संघीय कैबिनेट की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने टी20 वर्ल्ड कप को लेकर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान की पुरुष क्रिकेट टीम ग्रुप स्टेज में भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी. शहबाज शरीफ ने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है और इसे वह उचित मानते हैं.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने बयान में यह भी कहा कि खेलों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है. उनके अनुसार सरकार ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह रुख अपनाया है. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि अगर पाकिस्तान फाइनल में भारत से भिड़ता है तो उस स्थिति में उनका क्या फैसला होगा.
पाकिस्तान के इस फैसले पर ICC पहले ही चिंता जता चुका है. परिषद का मानना है कि किसी वैश्विक टूर्नामेंट में चुनिंदा मैच खेलने से प्रतियोगिता की निष्पक्षता और संतुलन प्रभावित होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को जुर्माना, राजस्व नुकसान, भविष्य के टूर्नामेंटों की मेजबानी से वंचित होने या खिलाड़ियों के लिए एनओसी से जुड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है.
पाकिस्तान का यह रुख बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल किए जाने के बाद सामने आया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ICC के फैसले को अनुचित बताया था. भारत-पाकिस्तान मुकाबला विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है, ऐसे में प्रसारक भी कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं. अब सबकी नजर ICC के अगले कदम पर टिकी है.