नई दिल्ली: संसद के निचले सदन में जारी गतिरोध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां लोकतांत्रिक परंपराओं और विधायी कार्यक्षमता के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का समापन आमतौर पर प्रधानमंत्री के गरिमामयी जवाब के साथ होता है, लेकिन वर्तमान हंगामे ने इस प्रक्रिया को अनिश्चित बना दिया है. सूत्रों का मानना है कि सरकार अब बिना प्रधानमंत्री के संबोधन के ही इस प्रस्ताव को पारित कराने की तैयारी में है ताकि आगामी बजट सत्र की कार्यवाही सुचारू रूप से शुरू हो सके.
लोकसभा की कार्यवाही में बुधवार को हुए अभूतपूर्व हंगामे के बाद अब यह संभावना प्रबल हो गई है कि धन्यवाद प्रस्ताव बिना पीएम मोदी के आधिकारिक भाषण के ही पास कर दिया जाएगा. निर्धारित समय के अनुसार प्रधानमंत्री को शाम पांच बजे चर्चा का जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सदस्यों के भारी शोर-शराबे और वेल में प्रदर्शन के कारण पीठासीन अधिकारी संध्या राय को सदन स्थगित करना पड़ा. विधायी कार्यों की गंभीरता को देखते हुए सरकार अब इस औपचारिकता को बिना संबोधन के ही पूरा करने पर विचार कर रही है.
सदन में चल रहे इस भारी बवाल के पीछे मुख्य कारण नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक के कुछ विवादास्पद अंशों को उठाना बताया जा रहा है. राहुल गांधी के इन संदर्भों के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई है. विपक्ष का दावा है कि इस पुस्तक में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ ऐसी कड़वी सच्चाइयां हैं जिनसे सरकार बचना चाहती है. इसी खींचतान ने पिछले कई दिनों से सदन की सामान्य कार्यवाही को पूरी तरह ठप कर दिया है.
जहां लोकसभा में प्रधानमंत्री का संबोधन टल गया है, वहीं सूत्रों का दावा है कि राज्यसभा में गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगे. इसके बाद दोनों सदनों से धन्यवाद प्रस्ताव को सामूहिक रूप से पारित करा लिया जाएगा. सरकार का मुख्य उद्देश्य अब आम बजट 2026 पर चर्चा शुरू करना है. विधायी कार्यों की सूची में बजट सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय कार्यवाही है और सरकार का मानना है कि इसमें किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी देश के आर्थिक हितों के लिए ठीक नहीं होगी.
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भाजपा ने विपक्ष पर हमलावर रुख अपना लिया है. भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों का व्यवहार हिंसक था और वे प्रधानमंत्री की कुर्सी तक चढ़ गए थे. तिवारी का सनसनीखेज दावा है कि विपक्षी महिला सदस्यों ने प्रधानमंत्री की चेयर का घेराव किया और उनकी मंशा मारपीट करने की थी. सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष सदन में चर्चा करने के बजाय केवल हंगामा करने और प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के उद्देश्य से आया था.
दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने सरकार के इन आरोपों को सिरे से दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री पर सीधा पलटवार किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री डरे हुए हैं और इसी कारण वे संसद में सच्चाई का सामना करने के लिए नहीं आ रहे हैं. राहुल गांधी का तर्क है कि प्रधानमंत्री को सदन में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए. इस आरोप-प्रत्यारोप ने संसद के भीतर की राजनीति को अत्यंत गरमा दिया है, जिससे भविष्य की कार्यवाही पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं.