नई दिल्लीः वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी ने दुनियी भर की राजनीति में भूचाल ला दिया है. रूस और उत्तर कोरिया के बाद अब चीन ने भी अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. चीन ने इस पूरी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाना बताया है और अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमाएं न लांघे.
चीन ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के इस ताकत दिखाने वाले रवैये का कड़ा विरोध करता है. अब देखना यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) में चीन और अमेरिका के बीच यह टकराव किस मोड़ पर पहुंचता है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में अमेरिका से कुछ मुख्य मांगें की हैं. चीन ने मांग की है कि राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए. अमेरिका को आगाह किया है कि हिरासत में लिए गए मादुरो और उनकी पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिका की जिम्मेदारी है. चीन का मानना है कि किसी भी देश की सरकार को हवाई हमलों और ताकत के दम पर गिराना गलत है. मुद्दों को बातचीत और संवाद से सुलझाया जाना चाहिए.
चीन ने इस सैन्य ऑपरेशन को वर्चस्ववादी कृत्य यानी अपनी दादागिरी दिखाने वाला कदम बताया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे इस बात से बेहद स्तब्ध हैं कि अमेरिका ने खुलेआम एक आजाद देश पर हमला किया और वहां के राष्ट्रपति को अगवा कर लिया. चीन के मुताबिक, यह कदम न केवल वेनेजुएला की आजादी का अपमान है, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा है.
दरअसल, वेनेजुएला के साथ चीन के संबंध बहुत पुराने और गहरे हैं. मादुरो सरकार और चीन के बीच बड़े रणनीतिक और कारोबारी समझौते रहे हैं. मादुरो के पतन से चीन को डर है कि उसके निवेश और वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में उसके प्रभाव को नुकसान पहुंच सकता है. चीन के डिपलोमेट भी इस हमले से पहले वहां मौजूद थे. अब अमेरिका के इस अंदाज पर चीन की प्रतिक्रिया क्या होती है. यह देखना दिलचस्प होगा.