नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है. दोनों देशों ने ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल से जुड़े एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते को भारत की रक्षा निर्यात नीति और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है.
सूत्रों के अनुसार इंडोनेशिया ने भारत से एक अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी खरीदने की योजना बनाई है. भविष्य में इस संख्या को तीन बैटरियों तक बढ़ाया जा सकता है. ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है और इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग भारत की रक्षा तकनीक पर बढ़ते भरोसे को दर्शाती है.
Breaking: India, Indonesia sign MoU on Brahmos, Astra missile annouced. pic.twitter.com/0NJYMNR6ny
— Sidhant Sibal (@sidhant) July 7, 2026
इंडोनेशिया ने भारत में विकसित अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल खरीदने का भी निर्णय लिया है. यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने विकसित की है. इंडोनेशिया की वायु सेना के पास पहले से सुखोई एसयू 30 लड़ाकू विमान हैं, जिनमें अस्त्र मिसाइल का एकीकरण अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य क्षमता और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के प्रदर्शन ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया. इसके बाद भारतीय रक्षा उपकरणों की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी देखने को मिली है. यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इंडोनेशिया के रणनीतिक महत्व वाले सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर भी सहमति जताई है. यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार गुजरता है. इस परियोजना से हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और समुद्री मौजूदगी मजबूत होगी.
इसके अलावा भारत इंडोनेशिया के स्टील, निकेल और दुर्लभ खनिज क्षेत्रों में निवेश करेगा. इससे इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत की बाहरी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
दोनों देशों ने इंडोनेशिया की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने में सहयोग पर भी सहमति जताई है. यह कदम लोकतांत्रिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ भारत की तकनीकी क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.