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पंजाब में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मान सरकार सख्त, 1800 से ज्यादा स्कूल बसों की औचक चेकिंग, 526 का चालान

पंजाब सरकार ने स्कूल बच्चों की सुरक्षा के लिए 'सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी' को सख्ती से लागू किया है. अप्रैल-मई में 1,842 स्कूल बसों की जांच हुई, 526 बसों के चालान काटे गए और नियम तोड़ने पर तीन बसें जब्त की गईं.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
पंजाब में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मान सरकार सख्त, 1800 से ज्यादा स्कूल बसों की औचक चेकिंग, 526 का चालान
Courtesy: X

पंजाब सरकार ने स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य में विशेष जांच अभियान चलाया गया. इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करते हुए चालान और जब्ती की कार्रवाई की गई.

स्कूल बसों की बड़े स्तर पर हुई जांच

पंजाब सरकार ने सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी को पूरी सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है. इसी अभियान के तहत अप्रैल और मई महीने में राज्यभर में स्कूल बसों की विशेष जांच की गई. सरकारी जानकारी के अनुसार, इस दौरान कुल 1,842 स्कूल बसों का निरीक्षण किया गया. जांच के दौरान अधिकारियों ने बसों की फिटनेस, जरूरी सुरक्षा उपकरण, दस्तावेज, ड्राइवरों के लाइसेंस और अन्य नियमों का बारीकी से परीक्षण किया. सरकार का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और स्कूल वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है.

नियम तोड़ने वालों पर हुई सख्त कार्रवाई

निरीक्षण अभियान के दौरान कई स्कूल बसों में नियमों की अनदेखी सामने आई. अधिकारियों ने ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करते हुए 526 स्कूल बसों के चालान जारी किए. इसके अलावा गंभीर नियम उल्लंघन मिलने पर तीन बसों को जब्त भी किया गया. सरकार ने साफ किया है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. संबंधित विभाग लगातार निगरानी कर रहा है ताकि भविष्य में भी सभी स्कूल वाहन तय नियमों के अनुसार ही संचालित हों.

बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

राज्य सरकार का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षित यात्रा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है. इसी कारण समय-समय पर ऐसे निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे. सरकार चाहती है कि सभी स्कूल वाहन पूरी तरह फिट हों और उनमें यात्रा करने वाले बच्चों को किसी तरह की परेशानी या खतरे का सामना न करना पड़े. अधिकारियों का मानना है कि नियमित जांच और सख्त कार्रवाई से स्कूल वाहन संचालकों में जिम्मेदारी बढ़ेगी और सुरक्षा नियमों का बेहतर पालन होगा. आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे ताकि अभिभावकों का भरोसा बना रहे और बच्चों की यात्रा सुरक्षित रहे.