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India Daily

पाकिस्तान को UAE का अल्टीमेटम, मांगे 3.5 अरब डॉलर? अब सऊदी और चीन के सामने हाथ फैला रहे शहबाज

यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर लौटाने को कहा है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ा है. अब पाकिस्तान सऊदी अरब और चीन से मदद मांगकर संकट से निकलने की कोशिश कर रहा है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
पाकिस्तान को UAE का अल्टीमेटम, मांगे 3.5 अरब डॉलर? अब सऊदी और चीन के सामने हाथ फैला रहे शहबाज
Courtesy: pintrest

नई दिल्ली: मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति के बीच पाकिस्तान एक बार फिर आर्थिक संकट के केंद्र में आ गया है. यूएई द्वारा 3.5 अरब डॉलर की वापसी की मांग ने उसकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है. इस स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान अब साउदी अरब और चाइना से कर्ज और निवेश की उम्मीद लगाए बैठा है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं.

कर्ज की मांग से बढ़ा दबाव

यूएई की ओर से अचानक कर्ज वापसी की मांग ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को असहज बना दिया है. बताया जा रहा है कि यूएई ने इस महीने के अंत तक लगभग 3.5 अरब डॉलर लौटाने को कहा है. इसमें 3 अरब डॉलर वह राशि है जो 2018 से स्टेट बैंक में जमा थी और हर साल रोलओवर होती रही. इसके अलावा करीब 45 करोड़ डॉलर का अलग कर्ज भी शामिल है. पहली बार ऐसा हुआ है जब रोलओवर की परंपरा टूटती दिख रही है, जिससे पाकिस्तान के लिए स्थिति और जटिल हो गई है.

सऊदी और चीन से सहारे की उम्मीद

इस दबाव से निपटने के लिए पाकिस्तान ने अपने पारंपरिक सहयोगियों की ओर रुख किया है. सऊदी अरब और चीन के साथ कर्ज और निवेश को लेकर बातचीत जारी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश मिलकर पाकिस्तान को राहत देने के लिए आगे आ सकते हैं. हालांकि यह मदद किस रूप में और कब तक मिलेगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है. पाकिस्तान के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह किसी तरह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर बनाए रखे.

विदेशी मुद्रा भंडार पर संकट

फिलहाल पाकिस्तान के पास करीब 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो केवल तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. ऐसे में अगर यूएई को पूरा भुगतान कर दिया जाता है, तो यह भंडार तेजी से घट सकता है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. आयात, मुद्रा विनिमय और महंगाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, जिससे आम जनता भी प्रभावित होगी.

राजनीतिक और क्षेत्रीय संकेत

इस पूरे घटनाक्रम को केवल आर्थिक नजरिए से नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संकेत भी तलाशे जा रहे हैं. हाल के समय में पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते मजबूत हुए हैं, जबकि यूएई और सऊदी के बीच कुछ मतभेद की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में यूएई की सख्ती को क्षेत्रीय राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि पाकिस्तान ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय संतुलन पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.