नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लाने का बड़ा कदम उठाया है. 30 जुलाई को केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया. यह बिल पहले ही लोकसभा में 10 घंटे की लंबी बहस के बाद पास हो चुका है.
जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह बिल छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता है. उन्होंने राज्यसभा को बुजुर्गों, वरिष्ठों और समझदारों का सदन कहा और सदस्यों से बिल पर गंभीर चर्चा करने की अपील की.
VIDEO | Parliament Monsoon Session: MoS Jitendra Singh introduces anti-paper leak bill in Rajya Sabha, says, "This bill, as all of know, has been passed by the Lower House, 10 hours of discussion time was allotted over there. Discussion did take place notwithstanding frequent… pic.twitter.com/tE58prXW8m
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जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे बिल का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके निजी हित इससे प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि UPA काल और 2014 के बाद विपक्ष शासित राज्यों में कई पेपर लीक हुए थे. उन्होंने यह भी कहा कि देश में दशकों तक पेपर लीक रोकने का कोई व्यापक कानून नहीं था. मोदी सरकार ने 2024 में पहली बार ऐसा कानून बनाया.
VIDEO | Delhi: Speaking in the Rajya Sabha while introducing the Anti-Paper Leak Bill, Minister of State Jitendra Singh said, "...And therefore, in an honest bid to carry forward what could have been carried forward by the earlier governments, the Public Examinations Bill, 2024,… pic.twitter.com/30nUxudePQ
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मंत्री ने बताया कि भारत में चार बड़े भर्ती और परीक्षा संगठन हैं, जिसमें UPSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS और NTA शामिल है. NTA बनाने का विचार सबसे पहले 1992 में आया था, जब कांग्रेस सत्ता में थी. कई समितियों ने इसकी सिफारिश की, लेकिन काम नहीं हुआ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अधूरे काम को पूरा किया. उन्होंने विपक्ष से पूछा कि वे 33 साल तक NTA क्यों नहीं बना सके?
VIDEO | Delhi: Speaking in the Rajya Sabha while introducing the Anti-Paper Leak Bill, Minister of State Jitendra Singh said, "...We have 4 main recruitment agencies that conduct examinations for different sectors, such as the Union Public Service Commission (UPSC), the Railway… pic.twitter.com/8AyHnv8U9V
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पेपर लीक की जांच 2 महीने में पूरी करनी होगी.
सामान्य पेपर लीक में 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख तक जुर्माना.
संगठित पेपर लीक (ऑर्गनाइज्ड क्राइम) में 7 साल से कम नहीं जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना.
राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे.
चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के अंदर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य.
केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स बना सकती है.