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पाकिस्तान में तख्तापलट! सेना की नई चाल, क्या आर्मी चीफ मुनीर बनेंगे राष्ट्रपति और बिलावल होंगे नए पीएम?

हाल ही में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत हुए असीम मुनीर अब पाकिस्तान के सबसे ताकतवर व्यक्ति बन गए हैं. इस रैंक के साथ उन्हें आजीवन सुरक्षा, विशेषाधिकार और कानूनी प्रतिरक्षा मिल जाती है.

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Edited By: Reepu Kumari
पाकिस्तान में तख्तापलट! सेना की नई चाल, क्या आर्मी चीफ मुनीर बनेंगे राष्ट्रपति और बिलावल होंगे नए पीएम?
Courtesy: Pinterest

Pakistan Politics: पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में है. देश में यह चर्चा जोरों पर है कि जल्द ही सत्ता की कमान पूरी तरह फौज के हाथों में जा सकती है. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से इस्तीफा मांगा जा सकता है और उनके स्थान पर सेना प्रमुख असीम मुनीर को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है.

इतना ही नहीं, मौजूदा संसदीय व्यवस्था को हटाकर राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की भी बातें सामने आ रही हैं. अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) बिलावल भुट्टो को नया पीएम बनाने की मांग कर रही है.

क्यों चर्चा में हैं फील्ड मार्शल असीम मुनीर?

हाल ही में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत हुए असीम मुनीर अब पाकिस्तान के सबसे ताकतवर व्यक्ति बन गए हैं. इस रैंक के साथ उन्हें आजीवन सुरक्षा, विशेषाधिकार और कानूनी प्रतिरक्षा मिल जाती है. उनकी विदेश यात्राएं और राजनीतिक सक्रियता साफ इशारा कर रही हैं कि वो सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहना चाहते.

शहबाज शरीफ और PMLN का विरोध क्यों?

मौजूदा पीएम शहबाज शरीफ और उनकी पार्टी PMLN इस पूरे बदलाव का खुलकर विरोध कर रही है. उन्हें डर है कि राष्ट्रपति प्रणाली लागू होते ही न सिर्फ उनकी सरकार गिरेगी, बल्कि शरीफ परिवार की राजनीति भी कमजोर पड़ जाएगी. यही वजह है कि पार्टी आर्मी के अलग-अलग गुटों से संपर्क साध रही है.

क्या बिलावल होंगे नए प्रधानमंत्री?

आसिफ अली जरदारी की गिरती सेहत के बीच खबर है कि वो इस्तीफा देने को तैयार हैं, बशर्ते बिलावल को बड़ी जिम्मेदारी दी जाए. PPP चाहती है कि बिलावल को पीएम बनाया जाए. हालांकि पार्टी के अंदर भी इस पर एकमत नहीं है.

क्या फिर होगा तख्तापलट?

यह पहला मौका नहीं होगा जब पाकिस्तान में सेना सत्ता संभालेगी. इससे पहले अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ भी फौज से सीधे राष्ट्रपति बने. फर्क सिर्फ इतना है कि असीम मुनीर का ये कदम बिना हथियारों के, ‘सॉफ्ट कू’ की तरह सामने आ सकता है.