Myanmar India Relation: म्यांमार में जुंटा सरकार के खिलाफ हो रहे हमलों ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है. जुंटा सरकार के विरोधियों ने भारतीय सीमा से लगे कई इलाकों के अतिरिक्त पश्चिमी म्यांमार के कई शहरों पर अपना कब्जा जमा लिया है. नई दिल्ली द्वारा आर्थिक सहायता से विकसित किए गए सितवे पोर्ट पर भी दबाव बढ़ गया है. सितवे शहर में भारत का वाणिज्यिक दूतावास भी है. बीते कुछ दिनों के भीतर ही मिलिशिया समूहों ने पॉक्टाव, क्याउक्ताव, जैसे शहरों पर कब्जा जमा लिया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते हफ्ते अराकान सेना ने कहा कि उसने सितवे शहर से 30 किमी दूर स्थित एक पुलिस टाउनशिप पर कब्जा कर लिया है. इसने रखाइन प्रांत की राजधानी में जुंटा सरकार को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा है. सितवे पोर्ट को भारतीय क्रेडिट लाइन के साथ 120 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट को विकसित किया गया था. यह प्रोजेक्ट भारत के कलादान बहुउद्देश्यीय परियोजना के लिए काफी अहमियत रखता है.
सितवे पोर्ट के कायाकल्प के बाद पिछले साल मई में पहले मालवाहक जहाज के आगमन के साथ इसका उद्घाटन किया गया था. 484 मिलियन डॉलर की महत्वाकांक्षी कलादान परियोजना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय शहर कोलकाता बंदरगाह और मिजोरम को सड़क मार्ग के जरिए जोड़ना है. म्यांमार के ताजा हालात को देखते हुए इस प्रोजेक्ट की प्रगति मुश्किल में नजर आ रही है. सागर के रास्ते माल को म्यांमार में सड़क और जलमार्गों के द्वारा भारत के पूर्वी राज्यों में पहुंचाना था. 2008 में इस प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग के बाद इसे लगातार देरी का सामना करना पड़ा है.
रखाइन राज्य में रहने वाले भारतीयों को लेकर विदेश मंत्रालय ने एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की थी. महीने की शुरुआत में ही भारत सरकार ने अपने लोगों को रखाइन की यात्रा न करने की सलाह दी थी. भारत सरकार म्यांमार के मौजूदा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. म्यांमार सैन्य तख्तापलट के बाद से चुनौतियों का सामना कर रहा है. म्यांमार की सेना के खिलाफ अराकान आर्मी,म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी, और ता आंग नेशनल लिबरेशन आर्मी भी शामिल हैं.