पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य होती दिखाई दे रही है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में हाल के दिनों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं. अब समझौते के बाद तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की गतिविधियों में तेजी आने लगी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं.
गुरुवार को सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज से होकर गुजरे. इन जहाजों में लगभग 60 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था. यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल तक इसी मार्ग पर तनाव और सुरक्षा जोखिमों को लेकर आशंकाएं बनी हुई थीं. समझौते के प्रभाव के बाद कई जहाज, जिन्होंने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान छिपा रखी थी, अब खुले तौर पर अपनी स्थिति प्रसारित करते हुए यात्रा कर रहे हैं. इससे समुद्री व्यापार में विश्वास लौटने के संकेत मिल रहे हैं.
وضعیت «تنگه هرمز» بعد از امضای تفاهمنامهhttps://t.co/ehxfM0L9CL pic.twitter.com/kZFXaAcTwG
— خبرگزاری ایسنا (@isna_farsi) June 18, 2026
ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाने का प्रावधान शामिल है. इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भाव 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है तो ऊर्जा आपूर्ति और बाजार स्थिरता को और मजबूती मिल सकती है.
हालांकि समुद्री मार्गों पर हालात बेहतर होते दिख रहे हैं, लेकिन लेबनान में संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है. गुरुवार को दक्षिणी लेबनान में नए हवाई हमलों की खबरें सामने आईं, जिनमें जान-माल के नुकसान की सूचना मिली. इस वजह से क्षेत्र में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. समझौते में लेबनान की स्थिरता और संप्रभुता का उल्लेख जरूर किया गया है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं.
समझौते के साथ अगले 60 दिनों की औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. इस दौरान युद्ध के स्थायी समाधान, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि मौजूदा समझौता स्थायी शांति का आधार बनता है या केवल अस्थायी राहत साबित होता है. फिलहाल होर्मुज से गुजरते जहाजों की बढ़ती संख्या क्षेत्र में भरोसे की वापसी का संकेत जरूर दे रही है.