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India Daily

ईरान समझौते का चेहरा बने जेडी वेंस, सफल हुए तो व्हाइट हाउस करीब; फेल हुए तो खत्म हो सकता है 2028 का खेल!

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ हुए नए समझौते के सबसे बड़े समर्थक बनकर उभरे हैं. ट्रंप प्रशासन की इस पहल का बचाव करने के साथ-साथ वह अपनी ही पार्टी के सवालों का सामना कर रहे हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
ईरान समझौते का चेहरा बने जेडी वेंस, सफल हुए तो व्हाइट हाउस करीब; फेल हुए तो खत्म हो सकता है 2028 का खेल!
Courtesy: Pinterest

अमेरिका की राजनीति में इन दिनों ईरान समझौता सबसे चर्चित विषय बना हुआ है. इस पूरे घटनाक्रम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. वह लगातार इस डील का बचाव कर रहे हैं और इसे ट्रंप प्रशासन की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं.हालांकि, इस समझौते ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी नई बहस छेड़ दी है. कुछ नेता इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, जबकि कई प्रभावशाली आवाजें इसके प्रावधानों पर सवाल उठा रही हैं. ऐसे में वेंस की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी इस समझौते से सीधे जुड़ गई है.

समझौते के प्रमुख प्रवक्ता बनकर उभरे वेंस

हाल के दिनों में जेडी वेंस ने कई मीडिया इंटरव्यू दिए और सार्वजनिक रूप से इस समझौते का समर्थन किया. रिपोर्टों के अनुसार वह स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित नए वार्ता दौर से भी जुड़े रह सकते हैं. ट्रंप प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम सदस्य बताते हुए इस प्रक्रिया में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है. इससे साफ है कि प्रशासन इस समझौते को आगे बढ़ाने में वेंस पर भरोसा जता रहा है.

सफलता और जोखिम दोनों साथ-साथ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वेंस के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. यदि यह पहल सफल रहती है तो उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा सकता है जिसने एक बड़े संघर्ष को शांत करने में भूमिका निभाई.दूसरी ओर यदि समझौता अपेक्षित परिणाम नहीं देता, तो आलोचकों का निशाना भी सबसे पहले वेंस ही बन सकते हैं. यही वजह है कि उनकी हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.

समझौते के प्रावधानों पर उठ रहे सवाल

समझौते के शुरुआती विवरण सामने आने के बाद विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं. कुछ रिपब्लिकन नेताओं और इजरायल समर्थक समूहों ने आशंका जताई है कि इससे ईरान को शुरुआती लाभ मिल सकता है. आलोचकों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं पर अभी स्पष्टता नहीं है. वहीं प्रशासन का दावा है कि ईरान को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत कई शर्तों का पालन करना होगा.

पार्टी के भीतर भी बढ़ी राजनीतिक बहस

ईरान मुद्दे ने रिपब्लिकन खेमे के भीतर अलग-अलग विचारधाराओं को सामने ला दिया है. एक वर्ग सख्त रुख की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा कूटनीतिक समाधान का समर्थन कर रहा है. इसी बीच वेंस लगातार पार्टी नेताओं से संवाद कर रहे हैं और समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं. फिलहाल यह स्पष्ट है कि समझौते का भविष्य चाहे जो हो, जेडी वेंस का राजनीतिक मूल्यांकन अब काफी हद तक इसी डील के नतीजों से जुड़ा रहेगा.