अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार गहराता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें तेहरान ने अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा था. ट्रंप ने इसके जवाब में कहा कि मुआवजा ईरान को अमेरिका को देना चाहिए.
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए अमेरिका से करीब 300 अरब डॉलर मुआवजे की मांग की है. इसके अलावा तेहरान ने अपनी 100 अरब डॉलर तक की जमी हुई संपत्तियां जारी करने की भी मांग रखी है. ईरान ने इन मांगों को होर्मुज को पूरी तरह खोलने से जोड़ दिया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ईरान की मुआवजे की मांग को एक दिलचस्प विचार बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भी भविष्य की बातचीत में अपनी मांग मजबूती से रखेगा. ट्रंप के अनुसार, ईरान को उन लोगों के परिवारों को मुआवजा देना चाहिए जो उसके हमलों और संघर्षों में मारे गए या घायल हुए हैं. उन्होंने 2000 में यूएसएस कोल पर हुए हमले समेत कई घटनाओं का उल्लेख किया.
ट्रंप ने ईरान के सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी का भी जिक्र किया, जिनकी 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हुई थी. ट्रंप ने दावा किया कि पिछले पांच महीनों के संघर्ष में 52 हजार लोग मारे गए हैं. हालांकि, उन्होंने इस आंकड़े के समर्थन में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.
ईरान ने होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं. इनमें युद्ध के नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंध हटाना, सैन्य धमकियां खत्म करना और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करना शामिल है. होर्मुज वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है. यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है.
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी संकेत दिया है कि अमेरिका की शर्तें नहीं माने जाने तक यह जलमार्ग युद्ध का मैदान बना रहेगा. इस बीच, मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित होने से वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ी है. ट्रंप लगातार होर्मुज को खुला रखने की बात कह रहे हैं, जबकि ईरान अपनी मांगों पर कायम नजर आ रहा है.