नई दिल्ली: मंगल ग्रह की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है. तस्वीर में चट्टानों के बीच इंसान जैसी आकृति दिखाई दे रही है. मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश कर रहे लोगों ने इसे परग्रही या किसी रहस्यमयी जीव से जोड़ दिया. हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक तस्वीर में दिख रही आकृति कोई इंसान नहीं, बल्कि छोटी चट्टान है. तस्वीर को बड़ा करने पर उसका आकार भ्रामक नजर आया, जिससे लोगों को इंसानी आकृति का भ्रम हुआ. अंतरिक्ष और दूसरे ग्रहों को लेकर लोगों की दिलचस्पी हमेशा बनी रही है. खासकर मंगल ग्रह की तस्वीर सामने आते ही लोग उनमें जीवन के संकेत तलाशने लगते हैं. ऐसी ही एक तस्वीर ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी. तस्वीर में दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई व्यक्ति लाल सतह पर खड़ा होकर आगे बढ़ रहा हो.
यह तस्वीर नासा के स्पिरिट रोवर ने मंगल की सतह पर स्थित गुसेव क्रेटर के होम प्लेट क्षेत्र से खींची थी. तस्वीर में चट्टानी जमीन के बीच एक छोटी सी आकृति दिखाई देती है. आकृति की मुद्रा कुछ ऐसी नजर आती है कि उसके हाथ फैले हुए हैं और एक पैर आगे की ओर बढ़ा हुआ है. इसी वजह से लोगों को इसमें चलते हुए इंसान का आकार दिखाई दिया.
तस्वीर सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे मंगल ग्रह पर जीवन का संभावित संकेत बताना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने इसे किसी परग्रही जीव से जोड़ा तो कुछ ने रहस्यमयी प्राणी की संभावना जताई. सोशल मीडिया पर तस्वीर को बार-बार बड़ा करके साझा किया गया. इसके बाद आकृति का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा नजर आने लगा और भ्रम और मजबूत हो गया.
वैज्ञानिकों के अनुसार तस्वीर में दिखाई देने वाली आकृति किसी इंसान या परग्रही जीव की नहीं है. वास्तव में यह केवल करीब छह सेंटीमीटर ऊंची एक छोटी चट्टान है. जब तस्वीर को बहुत ज्यादा बड़ा करके देखा गया तो उसके आसपास की वास्तविक दूरी और आकार का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया. इसी वजह से छोटी चट्टान किसी बड़े इंसान जैसी दिखाई देने लगी.
इस तरह किसी बेतरतीब वस्तु में इंसान, चेहरा या किसी परिचित चीज का आकार दिखाई देना एक सामान्य मानसिक प्रक्रिया है. इसे पैरिडोलिया कहा जाता है. हमारा दिमाग अनजान आकारों को समझने के लिए उन्हें ऐसी चीजों से जोड़ देता है जिन्हें हम पहले से पहचानते हैं. बादलों में चेहरा या चट्टान में इंसान दिखाई देना भी इसी प्रक्रिया का उदाहरण है.
मंगल ग्रह का वातावरण इंसानी जीवन के लिए बेहद कठिन है. वहां का तापमान बहुत कम रहता है और वातावरण बेहद पतला है. मंगल के वातावरण में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद है. वहां पृथ्वी जैसी सांस लेने योग्य हवा नहीं है. ऐसे हालात में बिना विशेष सुरक्षा पोशाक के किसी इंसान का खुले में घूमना संभव नहीं है.
इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि तस्वीर वास्तविक है और उसमें कोई छेड़छाड़ होने की बात सामने नहीं आई है. गलतफहमी तस्वीर के भीतर दिखाई देने वाली छोटी चट्टान के आकार को लेकर पैदा हुई. इसलिए मंगल ग्रह पर इंसान या परग्रही के मिलने का दावा इस तस्वीर से साबित नहीं होता. यह घटना एक बार फिर बताती है कि अंतरिक्ष से जुड़ी तस्वीरों को देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जानकारी को समझना कितना जरूरी है.