नई दिल्ली: मालदीव की राजधानी माले में 23 मार्च को एक सामान्य कूटनीतिक कार्यक्रम अचानक विवाद में बदल गया. अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर मालदीव पहुंचे थे और उन्होंने विदेश व रक्षा मंत्रियों से मुलाकात भी की, लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से उनकी महत्वपूर्ण बैठक आखिरी वक्त पर रद्द कर दी गई. अमेरिकी राजदूत को बिना राष्ट्रपति से मिले ही वापस लौटना पड़ा. यह घटना सिर्फ एक मुलाकात रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मालदीव की विदेश नीति, घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन की पूरी कहानी छिपी हुई है.
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने जानबूझकर अमेरिकी राजदूत से मुलाकात टाल दी. मुख्य वजह ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के प्रति उनका विरोध माना जा रहा है. मुइज्जू का रुख साफ है कि मालदीव इस युद्ध में किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहता. उन्होंने कहा कि उनके देश की कोई भी जमीन युद्ध के लिए इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी. आधिकारिक रूप से सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति बाहरी नेताओं से सीमित मुलाकातें कर रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं. जब अमेरिकी पक्ष ने दोबारा बैठक की बात की तो मालदीव ने बंद कमरे में मुलाकात का प्रस्ताव दिया, जिसे अमेरिकी राजदूत ने ठुकरा दिया.
राष्ट्रपति मुइज्जू ‘इंडिया आउट’ अभियान के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन अब उनकी स्थिति काफी कमजोर हो गई है. हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में उनकी पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़े शहरों में जीत हासिल की. एक संवैधानिक जनमत संग्रह में भी उनका प्रस्ताव जनता ने खारिज कर दिया. ऐसे में मुइज्जू पर घरेलू मोर्चे पर काफी दबाव है. इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी राजदूत से मुलाकात रद्द करना उनके लिए घरेलू समर्थकों को संदेश देने का तरीका भी हो सकता है.
मालदीव आर्थिक रूप से काफी दबाव में है. सरकार ने हाल ही में भारी कर्ज चुकाया है और अब भारत से 400 मिलियन डॉलर के लोन को आगे बढ़ाने की अपील कर रही है. भारत पहले ही दो बार लोन रोलओवर कर चुका है, इसलिए नई मांग पर विचार करना मुश्किल है. इसी बीच मुइज्जू सरकार ने एक बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट को चीन की कंपनी को सौंप दिया है, जिससे भारत के साथ संबंधों में तनाव बढ़ा है. मालदीव चीन और भारत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह संतुलन काफी नाजुक हो गया है.
राष्ट्रपति मुइज्जू ने सर्जियो गोर के मामले पर साफ कहा कि ईरान युद्ध को लेकर मालदीव के पास अमेरिका से चर्चा करने के लिए कुछ भी नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मालदीव किसी भी युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और अपनी भूमि किसी विदेशी सैन्य गतिविधि के लिए उपलब्ध नहीं कराएगा. बैठक रद्द होने से पहले सोशल मीडिया पर अमेरिकी राजदूत के खिलाफ हिंसक टिप्पणियां भी वायरल हुई थीं, जिससे सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ गई थीं. यह पूरा मामला मालदीव की स्वतंत्र विदेश नीति और क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ते संतुलन की ओर इशारा कर रहा है.