menu-icon
India Daily

जब सैनिक कम पड़े तो यूक्रेन ने रूस के खिलाफ युद्ध में उतारे रोबोट, 'साइलेंट डेथ' बनकर कर रहे मुकाबला

सैनिकों की कमी से जूझ रहे यूक्रेन ने युद्ध में बड़े पैमाने पर रोबोट और ड्रोन तैनात किए हैं. इनकी मदद से हमले, निगरानी, रसद और बचाव कार्य किए जा रहे हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
जब सैनिक कम पड़े तो यूक्रेन ने रूस के खिलाफ युद्ध में उतारे रोबोट, 'साइलेंट डेथ' बनकर कर रहे मुकाबला
Courtesy: @komarglobal x account

नई दिल्ली: युद्ध के मैदान में अब सैनिक ही गोलियों की बौछार नहीं कर रहे हैं. इसके बजाय रोबोट जो 'खामोश मौत' की तरह काम कर रहे हैं. अब दुश्मन पर कहर बरपा रहे हैं. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में मौजूदा हालात ऐसे हैं कि यूक्रेन को सैनिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इस कमी को पूरा करने के लिए देश ने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. 

इसी मकसद से रोबोटिक सैनिक तैयार किए गए हैं और बड़े पैमाने पर तैनात किए गए हैं. जिसके वजह से जिन स्थितियों में आमतौर पर हजारों इंसानी सैनिकों की जरूरत पड़ती, वहां अब कुछ ही मशीनें अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को पूरी तरह तबाह करने में सक्षम हैं. रिपोर्ट के अनुसार इन रोबोटों को हजारों मील दूर से रिमोट के जरिए ऑपरेट किया जा रहा है. रूसी सैन्य बलों के ठिकानों और स्थितियों को ट्रैक करने के बाद हमले किए जा रहे हैं.

जेलेंस्की ने क्या कहा?

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार इसी साल जनवरी में ही 22,000 से ज्यादा ड्रोन और रोबोट युद्धक अभियानों में तैनात किए गए हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में यूक्रेन ने पूरी तरह से रोबोट और ड्रोन की ताकत के दम पर रूस के एक ठिकाने पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया बिना युद्ध के मैदान में एक भी इंसानी सैनिक उतारे. 

युद्ध के मैदान में मशीनों की तैनाती यह दिखाती है कि युद्ध का स्वरूप कितना बदल गया है. ये रोबोटिक सैनिक और ड्रोन न केवल लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हैं, बल्कि बचाव कार्यों में भी अमूल्य साबित हो रहे हैं. इनकी मदद से मोर्चे पर हथियार, भोजन और पानी पहुंचाना काफी आसान हो गया है. इसके अलावा ये घायल सैनिकों को सटीक रूप से निकालने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भी बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं.

कैसे करता है काम?

कुछ रोबोटिक सिस्टम को भारी मशीन गनों से लैस किया गया है. ये यूनिटें कई दिनों तक छिपी रहने में सक्षम हैं और जैसे ही कोई मौका मिलता है, ये हमला कर देती हैं. इन मिशनों में सहायता के लिए युवा प्रोग्रामरों और तकनीशियनों को शामिल किया गया है. मिलकर काम करते हुए, वे संचार प्रणालियों, नेविगेशन सॉफ्टवेयर और काउंटर-जैमर तकनीकों को विकसित और बेहतर बना रहे हैं.