नई दिल्ली: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब वॉशिंगटन ने एक तेज और गोपनीय सैन्य कार्रवाई में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के बाद मादुरो को अमेरिका लाया गया है और राजनीतिक संक्रमण तक वेनेजुएला का प्रशासन संभाला जाएगा. इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है.
अमेरिकी बलों ने हवाई, थल और समुद्री मोर्चों से 160 मिनट तक चला अभियान चलाया. इस दौरान काराकस और आसपास के इलाकों में जोरदार धमाके सुने गए. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मादुरो और उनकी पत्नी को फुएर्ते तियूना परिसर से हिरासत में लिया गया. इसके बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से एक अमेरिकी युद्धपोत तक ले जाया गया और फिर न्यूयॉर्क भेजा गया.
सैटेलाइट तस्वीरों में काराकस स्थित फुएर्ते तियूना सैन्य परिसर को व्यापक नुकसान दिखा. यह वेनेजुएला का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र माना जाता है. कई इमारतें क्षतिग्रस्त नजर आईं और आसपास का ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ. तस्वीरें 3 जनवरी को जारी की गईं, जिनमें धमाकों के निशान साफ दिखाई देते हैं.
वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने कहा कि हमलों में आवासीय इलाके भी प्रभावित हुए. फुएर्ते तियूना के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला ग्वायरा राज्यों में भी विस्फोट हुए. स्थानीय लोगों ने रात के समय बिजली गुल होने और लगातार धमाकों से दहशत फैलने की बात कही.
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस मिशन का नाम “एब्सोल्यूट रिजॉल्व” रखा गया था और इसकी तैयारी महीनों से चल रही थी. जनरल डैन केन के अनुसार 150 से ज्यादा विमान तैनात किए गए, जिनमें बॉम्बर, फाइटर जेट और निगरानी विमान शामिल थे. ऑपरेशन के दौरान काराकस में लगभग पूरी तरह अंधेरा कर दिया गया.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि मादुरो अत्यंत कड़ी सुरक्षा में थे और एक किले जैसे राष्ट्रपति आवास में छिपे थे. उन्होंने दावा किया कि मादुरो सुरक्षित कमरे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए. इस बयान के बाद अमेरिका की भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.