नई दिल्लीः शनिवार तड़के अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में एक बिजली कड़कने जैसा हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया. इस सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' का नाम दिया गया.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार-ए-लागो से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि अमेरिका अब वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक कि सत्ता का उचित हस्तांतरण नहीं हो जाता. बता दें कि इस पूरे सैन्य ड्रामे के पीछे जो असली खेल है वो तेल का है.
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (303 अरब बैरल) है, लेकिन वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर सड़ चुका है. उन्होंने घोषणा की कि अमेरिकी तेल कंपनियां जल्द ही वहां अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और तेल निकालना शुरू करेंगी. ट्रंप के अनुसार, इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का एक हिस्सा अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के खर्च की भरपाई के रूप में रखा जाएगा.
अमेरिकी विमानों ने काराकास की बिजली काट दी और रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी की. मादुरो को उनकी किले जैसी हवेली से उठाकर USS Iwo Jima युद्धपोत पर ले जाया गया. मादुरो को अब न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन पर नारको-टेररिज्म और तस्करी के गंभीर आरोप चलाए जाएंगे. वेनेजुएला का 80% तेल चीन को जाता था.
ट्रंप का यह कदम दक्षिण अमेरिका में चीन की आर्थिक कमर तोड़ने जैसा है. इस हमले की वैश्विक निंदा भी शुरू हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक खतरनाक मिसाल बताया है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखती है.
सोमवार को बाजार खुलने पर कच्चे तेल (Crude Oil) और सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की आशंका है. जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल उत्पादन फिर से शुरू होने में 5-7 साल लग सकते हैं, लेकिन ट्रंप के इस आक्रामक रवैये ने निवेशकों को डरा दिया है.
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया भर में विरोध की एक जबरदस्त लहर उठ खड़ी हुई है, जिसे कई वैश्विक नेता और विशेषज्ञ आधुनिक साम्राज्यवाद का नया चेहरा बता रहे हैं. अमेरिकी राजनीति के दिग्गज और सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इस हमले की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल अवैध और असंवैधानिक" करार दिया, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक काला अध्याय भी बताया.