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जैश सरगना मसूद अजहर के भाई की पाकिस्तान में मौत, वजह का नहीं लग पाया पता

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के छोटे भाई मोहम्मद ताहिर अनवर का पाकिस्तान में निधन हो गया है. उनकी मौत की सही वजह अभी तक साफ नहीं है. ताहिर अनवर कई सालों से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से करीब से जुड़े थे

Shilpa Shrivastava
जैश सरगना मसूद अजहर के भाई की पाकिस्तान में मौत, वजह का नहीं लग पाया पता
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के छोटे भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की मौत हो गई है. इसकी मौत पाकिस्तान में हुई. ताहिर अनवर की मौत कैसे हुई, इसकी सही वजह का पता नहीं लग पाया है. बता दें कि ताहिर पिछले कई सालों से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से करीब से जुड़ा था. इस संगठन के ऑपरेशन्स में अहम भूमिका भी निभाता था. इसकी मौत का ऐलान संगठन के ऑफिशियल चैनल के जरिए किया गया. 

ऑफिशियल चैनल पर बताया गया कि सोमवार देर रात पाकिस्तान के बहावलपुर में जामिया मस्जिद उस्मान वाली में उनकी जनाजे की नमाज अदा की जाएगी. अब तक, ताहिर की मौत की वजह के बारे में कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है. किसी बीमारी या हादसे के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई है. इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं.

जैश-ए-मोहम्मद कई बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार:

बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद एक जाना-माना आतंकी संगठन है, जो भारत में कई बड़े हमलों के लिए जिम्मेदार है. जैश 2001 में भारतीय संसद पर, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर, उरी में भारतीय सैनिकों और 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में शामिल था. जैश को मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमले किए हैं. 

भारतीय सेना ने किया था जैश के ठिकानों पर हमला:

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के तहत ऐसा ही एक बड़ा हमला किया गया था. यह 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए जानलेवा आतंकी हमले का भारत का जवाब था. बता दें कि पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे. बहावलपुर पर हुए इस हमले में मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्य मारे गए थे. इसमें उसकी बहन, बहनोई, एक भतीजा, एक भतीजी और परिवार के अन्य बच्चों समेत करीब 10 रिश्तेदारों की मौत हो गई थी. 

सिर्फ यही नहीं, इस हमले में अजहर के कई करीबी साथी भी मारे गए थे. बहावलपुर में जैश का हेडक्वार्टर और जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह बुरी तरह से तबाह हो गए थे. पिछले साल सितंबर में, जैश-ए-मोहम्मद ने पहली बार इनडायरेक्ट तरीक से इन भारी नुकसानों को स्वीकार किया था.