नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के नए कानूनों को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है. महिलाओं की सहमति, बाल विवाह, घरेलू हिंसा और शिक्षा से जुड़े नए नियमों पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है. सोशल मीडिया पर भी इन कानूनों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
सबसे ज्यादा विवाद उस नियम को लेकर हो रहा है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई लड़की शादी के प्रस्ताव पर चुप रहती है, तो उसकी चुप्पी को भी सहमति माना जा सकता है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि शादी जैसे बड़े फैसले में स्पष्ट और खुली सहमति जरूरी होती है. सिर्फ चुप रहने को हां मानना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है.
नए नियमों में यह भी कहा गया है कि नाबालिग लड़कियों का निकाह उनके पिता या दादा कर सकते हैं. आलोचकों का कहना है कि इससे बाल विवाह को बढ़ावा मिलेगा और छोटी उम्र की लड़कियों का भविष्य प्रभावित होगा. कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले भी अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा और आजादी पर चिंता जताई थी.
घरेलू हिंसा को लेकर बनाए गए नियम भी विवादों में हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर पति पत्नी या बच्चों के साथ मारपीट करता है, तो कार्रवाई तभी होगी जब गंभीर चोट, हड्डी टूटने या बड़े घाव के सबूत हों. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मानसिक और भावनात्मक हिंसा भी उतनी ही गंभीर होती है जितनी शारीरिक हिंसा.
नए कानूनों के अनुसार शादी खत्म करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी यानी महिलाएं खुद आसानी से तलाक या अलग होने का फैसला नहीं ले सकेंगी. आलोचकों का कहना है कि इससे महिलाओं के लिए खराब वैवाहिक संबंधों से बाहर निकलना और मुश्किल हो जाएगा.
अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा को लेकर भी विवाद लगातार जारी है. तालिबान सरकार पहले ही लड़कियों की छठी कक्षा के बाद की पढ़ाई पर रोक लगा चुकी है. यूनिवर्सिटी में महिलाओं की शिक्षा पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. इसका असर लाखों छात्राओं के भविष्य पर पड़ रहा है.
एक अन्य नियम के मुताबिक शादीशुदा महिलाओं को पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाने पर सजा दी जा सकती है. इस नियम को महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया जा रहा है.
2021 में सत्ता में वापसी के बाद तालिबान ने शुरुआत में महिलाओं को अधिकार देने की बात कही थी लेकिन धीरे-धीरे शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी पर कई प्रतिबंध लगाए गए. अब नए नियमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और चिंता को और बढ़ा दिया है.