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युद्ध का खामियाजा भुगत रहा भारत...! US-ईरान के पछड़े से इस तरह निकल सकता है बाहर

अमेरिकी और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. दूसरों की लड़ाई में भारत क्यों फंसता है यह समझना जरूरी है और लड़ाइयों का असर भारत पर ना पड़े इसके लिए कुछ खास बदलाव जरूरी हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
युद्ध का खामियाजा भुगत रहा भारत...! US-ईरान के पछड़े से इस तरह निकल सकता है बाहर
Courtesy: AI

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है. पेट्रोल-डीजल से लेकर दूध और ब्रेड तक महंगे हो गए हैं. दुनिया के दो देशों के बीच चल रहे जंग का खामियाजा भारत को भुगतना पड़ रहा है. लेकिन अमेरिका जो इस युद्ध में खुद शामिल है, उस पर कोई ज्यादा प्रभाव नजर नहीं आ रहा है. 

अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर हैं, वहीं भारतीय बाजार दबाव में आ गया है. तेज रफ्तार में आगे बढ़ रही भारत की विकास दर अब सुस्त पड़ने लगा है. ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया में चल रहे तनाव का सीधा असर भारत पर क्यों पड़ता है और इससे भारत कैसे निकल सकता है. 

क्या है भारत की समस्या?

भारत की सबसे बड़ी मजबूरी कच्चा तेल है. देश अपने जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव बढ़ता है तो होर्मुज की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हो जाते हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं. जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. वहीं इसके विपरीत अमेरिका जैसे देश खुद इस समय तेल का सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है. उसके लिए तेल की कीमतों का बढ़ना फायदेमंद साबित होता है.

इसके अलावा दूसरी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर है. वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में अमेरिकी डॉलर की ओर भागते हैं. जिसकी वजह से रुपया कमजोर पड़ जाता है. इसके अलावा एक और सबसे बड़ी समस्या है. समस्या यह है कि तनाव के समय निवेश भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर ले जाते हैं. क्योंकि अमेरिका को निवेशकों द्वारा सेफ हेवन कहा जाता है, जहां युद्ध की स्थिति में निवेशकों की पूंजी सुरक्षित रहती है.

युद्ध की स्थिति में भारत का माइनस पॉइंट  

युद्ध की स्थिति में भारत के लिए एक सबसे बड़ा माइनस पॉइंट है. दुनिया भर में भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजों को एक्सपोर्ट करता है. लेकिन युद्ध के कारण समुद्री रास्ते बंद हो जाते हैं या फिर जहाजों को लंबी रूट्स लेनी पड़ती हैं, जिसमें खर्च बढ़ जाते हैं. फिर जब ये सारे सामान विदेशी बाजारों में पहुंचता है तो इसके दाम कई गुना ज्यादा बढ़ जाते हैं, ऐसे में लोग कम महंगी चीजों को चुनते हैं और भारतीय सामानों की बिक्री घट जाती है. अब इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए भारत के पास कुछ रास्ते हैं. लेकिन इस पर चलने से पहले भारत को अपनी रणनीति मजबूत करनी होगी.

इन क्षेत्रों में बदलाव की जरूरत 

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस समस्या से निकलने के लिए सबसे पहले अपनी निर्भरता दूसरे देशों पर कम करनी होगी, यानी अपने तेल आयात को कम करना होगा. इसके लिए हमें इलेक्ट्रिक सामानों की ओर बढ़ना होगा. साथ ही इस बात पर जोर देना होगा कि जिस देश के साथ व्यापार करे उसी देश की मुद्रा में करे. जिससे डॉलर की दादागीरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम होगी और फॉरेक्स रिजर्व बचेंगे. इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार को मजबूत करने पर जोर देना होगा. इसके अलावा भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनना होगा. तभी भारत दूसरों की लड़ाई में खुद के लॉस को बचा पाएगा.