नई दिल्ली: ईरान के सरकारी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार 19 वर्षीय उभरते हुए पहलवान सालेह मोहम्मदी को गुरुवार को कोम शहर में दो अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई. तीनों को जनवरी 2026 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिस अधिकारियों की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था. उनकी गिरफ्तारी के बाद तीनों पर 'मोहारेबेह' यानी 'ईश्वर के प्रति शत्रुता' का आरोप लगाया गया.
ईरानी कानून के तहत इसे एक अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए मृत्युदंड का प्रावधान है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि फांसी दिए जाने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया गया था. उनके अनुसार आरोपियों को बचाव पक्ष के वकील उपलब्ध कराए गए थे और इस मामले को ईरान के सर्वोच्च न्यायालय से अंतिम मंजूरी मिली थी. फांसी 'जनता की उपस्थिति' में दी गई.
State media reported the executions of protesters Saleh Mohammadi, Saeed Davodi and Mehdi Ghasemi who were accused of participating in the murders of two policemen during protests in Qom on 8 January 2026. The executions were carried out “in the presence of a group of people in… pic.twitter.com/nL9LmLaclp
— Iran Human Rights (IHRNGO) (@IHRights) March 19, 2026
एक ऐसी प्रथा जिसे सरकार न्यायिक पारदर्शिता के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत कर रही है. हालांकि आलोचकों का आरोप है कि आरोपियों से जबरन इकबालिया बयान लिए गए और उन्हें 'मोहारेबेह' यानी ईश्वर के विरुद्ध युद्ध छेड़ना जैसे गंभीर आरोपों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने हेतु यातना का सहारा लिया गया.
मोहम्मदी एक युवा फ्रीस्टाइल पहलवान थे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहले ही अपना नाम बनाना शुरू कर दिया था. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाने की प्रक्रिया में थे. हालांकि जनवरी 2026 में कोम शहर में फैले विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी गिरफ्तारी ने उनके जीवन की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया.
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार मोहम्मदी अपने साथी प्रदर्शनकारियों, मेहदी घासेमी और सईद दाऊदी के साथ जनवरी 2026 के प्रदर्शनों के दौरान 'चाकू और तलवारों का उपयोग करके' दो पुलिस अधिकारियों की हत्या करने का आरोप लगाया गया था. इन आरोपों पर दोषी ठहराए जाने के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पहले तेहरान से फांसी रोकने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की थी. इन अपीलों के बावजूद ईरान ने सजा को अंजाम दिया. अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि मोहम्मदी और उनके साथियों ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों के सदस्यों की हत्या की थी. ईरानी सरकार ने इस घटना को एक हिंसक विद्रोह करार दिया. इसी आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी पाया और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा.