नई दिल्ली: हर साल 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब एक वैश्विक अभियान का रूप ले चुका है. भारत की प्राचीन परंपरा से निकला योग आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में अपनाया जा रहा है. स्वास्थ्य, मानसिक शांति और संतुलित जीवन के लिए योग को दुनिया भर में बड़ी पहचान मिल चुकी है.
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दुनिया के लगभग हर हिस्से में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के कई देशों में बड़े स्तर पर योग सत्र आयोजित होते हैं.
साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम Yoga for Healthy Ageing यानी 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' रखी गई है. इसका उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि बढ़ती उम्र में भी योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है.
इस वर्ष अमेरिका के न्यूयॉर्क, सिएटल, वॉशिंगटन डीसी और नॉर्थ कैरोलाइना जैसे शहरों में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है. वहीं यूरोप के स्लोवाकिया, हंगरी, पुर्तगाल, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य सहित कई देशों में भी योग दिवस को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत भारत की पहल पर हुई थी. 27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव को 177 देशों का समर्थन मिला, जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे तेज और सबसे व्यापक समर्थन पाने वाले प्रस्तावों में शामिल रहा.
इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा कर दी. पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को आयोजित किया गया था.
नई दिल्ली के राजपथ पर हुए पहले आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ करीब 35,985 लोगों ने एक साथ योग किया था. इस आयोजन ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए थे और दुनिया का ध्यान योग की ओर आकर्षित किया था.