Russian Oil Gains: रूस से तेल लेने को लेकर अमेरिका भारत पर दवाब बना रहा है. अमेरिका ने इस मुद्दे को तूल देकर भारत को निशाना बनाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया है. अमेरिका का दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध का फायदा उठा रहा है और मुनाफाखोरी कर रहा है. लेकिन, ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए की ताजा रिपोर्ट इस दावे की हकीकत को उजागर करती है. यह रिपोर्ट बताती है कि रूस से तेल खरीदने का भारत को उतना लाभ नहीं हो रहा, जितना अमेरिका बता रहा है.
सीएलएसए की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से सस्ते कच्चे तेल के आयात से भारत को होने वाला आर्थिक लाभ पहले के अनुमानों से कहीं कम है. जहां पहले यह अनुमान लगाया गया था कि भारत को रूस से तेल खरीदने से सालाना 10 से 25 अरब डॉलर का फायदा हो रहा है, वहीं यह रिपोर्ट बताती है कि वास्तविक लाभ केवल 2.5 अरब डॉलर के आसपास है. यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का महज 0.06 फीसदी है.
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया था. उस समय रूस ने वैश्विक प्रतिबंधों के बीच भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों को सस्ते दामों पर तेल बेचना शुरू किया. शुरुआत में रूसी तेल पर 20-25 डॉलर प्रति बैरल की भारी छूट मिल रही थी, जिससे भारत को आर्थिक लाभ हुआ. हालांकि, अब यह छूट घटकर 2-3 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, जिसके चलते लाभ की मात्रा भी कम हो गई है.
अमेरिका ने लगाया एकस्ट्रा टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे रिफाइन करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमा रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक सहायता मिल रही है. लेकिन सीएलएसए की रिपोर्ट इस दावे को खारिज करती है. यह स्पष्ट करती है कि भारत का लाभ उतना बड़ा नहीं है, जितना अमेरिका दावा कर रहा है.
इसके बाद भी अमेरिका भारत पर टैरिफ लगा लगा दिया है. भारतीय उत्पादों, जैसे कपड़े, ज्वेलरी, जूते, फर्नीचर और रसायनों पर अब 50 फीसदी तक टैरिफ लागू हो गया है.