अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. उन्हें अंटार्कटिका में स्थित IceCube Neutrino Observatory के विकास और ब्रह्मांड से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज में निर्णायक योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
न्यूट्रिनो बेहद हल्के और विद्युत आवेश रहित कण हैं. ये पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, इसलिए अरबों न्यूट्रिनो हर सेकंड हमारे शरीर से गुजर जाते हैं, लेकिन उनका पता लगाना बेहद कठिन होता है. यही गुण उन्हें ब्रह्मांड के दूरस्थ स्रोतों की जानकारी हासिल करने का अनोखा माध्यम बनाता है.
BREAKING NEWS The Royal Swedish Academy of Sciences has decided to award the 2026 #NobelPrize in Physics to Francis Halzen “for decisive contributions to the IceCube Neutrino Observatory and the discovery of high-energy neutrinos of astrophysical origin.” https://t.co/UcPBWk0RiK
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 6, 2026
हाल्जेन ने 1988 में अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चादर को एक विशाल कण डिटेक्टर के रूप में इस्तेमाल करने का विचार रखा था. IceCube में बर्फ के भीतर हजारों प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं. जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणु से टकराता है, तो पैदा होने वाली बेहद छोटी प्रकाश चमक सेंसर रिकॉर्ड करते हैं.
IceCube का निर्माण कई वर्षों में पूरा हुआ और 2011 में वेधशाला पूरी तरह तैयार हुई. यह लगभग एक घन किलोमीटर अंटार्कटिक बर्फ में फैली है. इसके बाद वैज्ञानिकों ने उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो का पता लगाना शुरू किया और इनमें से कुछ के स्रोत हमारे सौरमंडल से भी बहुत दूर पाए गए.
इस खोज ने न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के लिए नई राह खोली. प्रकाश या विद्युत आवेश वाले कणों के विपरीत न्यूट्रिनो अंतरिक्ष में लगभग सीधी दिशा में यात्रा कर सकते हैं. इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल और सक्रिय आकाशगंगाओं जैसी अत्यधिक ऊर्जावान ब्रह्मांडीय घटनाओं के स्रोत समझने में मदद मिलती है.
IceCube लगातार नए आंकड़े जुटा रहा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इन आंकड़ों से उन अंतरिक्षीय स्रोतों की पहचान और बेहतर होगी, जहां अत्यधिक ऊर्जा वाले कण पैदा होते हैं. हाल्जेन का सम्मान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके काम ने ब्रह्मांड को देखने का एक बिल्कुल नया तरीका मजबूत किया है.