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आखिर किस बात पर भड़के छात्र? बांग्लादेश-नेपाल के बाद फ्रांस में सड़कों पर उतरे Gen Z

फ्रांस में हाई स्कूल के हजारों छात्र शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
आखिर किस बात पर भड़के छात्र? बांग्लादेश-नेपाल के बाद फ्रांस में सड़कों पर उतरे Gen Z
Courtesy: @Maeestro X Account

फ्रांस में हाई स्कूल के छात्रों का आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है. पेरिस समेत कई शहरों में हजारों किशोर स्कूलों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगहों पर स्कूलों के गेट बंद कर दिए गए हैं. छात्रों का गुस्सा मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था में निवेश की कमी, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और जर्जर स्कूल इमारतों को लेकर है. 

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक ठीक नहीं हैं. कहीं छत से पानी टपकने की शिकायत है तो कहीं इमारतों की हालत खराब है. छात्रों ने कक्षाओं में कॉकरोच मिलने, अत्यधिक गर्मी, शिक्षकों की कमी और कई बार 30 से 40 छात्रों वाली कक्षाओं की समस्या भी उठाई है. 

क्या चाहते हैं छात्र?

पेरिस के लिसी वोल्टेयर स्कूल की 17 वर्षीय छात्रा सोफिया ने कहा कि छात्र चाहते हैं कि सरकार उनकी बात सुने. उनके मुताबिक खराब परिस्थितियों में पढ़ाई करने के बजाय सड़क पर खड़े होकर अपनी आवाज उठाना उन्हें जरूरी लग रहा है. छात्रों के हाथों में ऐसे पोस्टर भी दिखाई दिए जिनमें शिक्षा को अधिकार बताया गया है, विशेषाधिकार नहीं. 

शिक्षा बजट और युवाओं के भविष्य का सवाल

छात्रों की नाराजगी केवल स्कूलों की इमारतों तक सीमित नहीं है. वे शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ाने, शिक्षकों और स्टाफ की कमी दूर करने, छात्रों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने और रोजगार से जुड़ी नीतियों में सुधार की मांग कर रहे हैं. यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब फ्रांस सरकार 2027 के बजट में खर्च कम करने की योजना पर काम कर रही है. रॉयटर्स के मुताबिक सरकार ने लगभग 54 अरब यूरो की बचत का लक्ष्य रखा है और शिक्षा के लिए प्रस्तावित बढ़ोतरी महंगाई की तुलना में कम रहने की बात सामने आई है. 

आंदोलन स्कूलों से निकलकर सड़कों तक पहुंचा

सितंबर के अंत में शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे फ्रांस के कई हिस्सों तक फैल गया. छात्रों ने स्कूलों के बाहर कचरे के डिब्बों और दूसरी चीजों से बैरिकेड बनाए. कुछ जगहों पर कचरे के डिब्बों में आग लगाए जाने और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी हुईं. सरकार ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की है. 

2 अक्टूबर तक सैकड़ों स्कूलों की गतिविधियां प्रभावित हुई थीं और करीब 3,000 किशोरों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी. कई स्कूलों और शिक्षकों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें आईं. वहीं कुछ शिक्षक संगठनों और शिक्षकों ने छात्रों की शिक्षा संबंधी शिकायतों का समर्थन किया है. 

क्या यह बांग्लादेश और नेपाल जैसा आंदोलन है?

फ्रांस के मौजूदा प्रदर्शन को बांग्लादेश और नेपाल के हालिया युवा आंदोलनों से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि तीनों जगह युवाओं की बड़ी भागीदारी दिखाई दी है. हालांकि फ्रांस में मौजूदा आंदोलन की प्रमुख मांगें शिक्षा व्यवस्था, सरकारी खर्च और युवाओं के भविष्य से जुड़ी हैं. इसलिए इसे सीधे किसी दूसरे देश के सत्ता परिवर्तन वाले आंदोलन के समान बताना अभी जल्दबाजी होगी.

फिलहाल फ्रांस की सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की शिक्षा से जुड़ी शिकायतों का समाधान कैसे किया जाए और साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान को कैसे रोका जाए. छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है.